संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रसिद्ध पर्यटन क्षेत्र देवगढ़ में हेलीपोर्ट बनाया जाएगा। जिला प्रशासन ने इसके लिए जमीन चिन्हित करना शुरू कर दिया है। करीब 15.5 करोड़ रुपये से पांच एकड़ जमीन पर यह हेलीपोर्ट बनाया जाएगा। देवगढ़ में हेलीपोर्ट बन जाने से यह क्षेत्र सीधे दूसरे शहरों से जुड़ जाएगा और यहां पर्यटन में तेजी आएगी।
देवगढ़ पर्यटन के मामले में पूरे देश में जाना जाता है। यहां प्राचीन दशावतार मंदिर और मूर्तियां हैं। जैन धर्म के भी कई प्राचीन मंदिरों की शृंखला है। सैकड़ों वर्ष पुरानी मूर्ति कला का यहां संग्रह है। इस क्षेत्र में विंध्यांचल पहाड़ी में बौद्ध धर्म के कर्म चिन्ह मौजूद हैं। पहाड़ी में बौद्ध धर्म की कई कलाकृतियां भी अंकित हैं। वहीं से सटकर बेतवा नदी प्रवाहित होती है, इससे पहाड़ों और नदी का अनूठा संगम पर्यटकों को आकर्षित करता है। देवगढ़ की पहाड़ी से देखने पर यह विशाल नदी एक पतली रेखा के रूप में दिखाई देती है। नदी में स्टीमर से विंध्यांचल पर्वत के घने जंगल का अनुपम दृश्य देखा जा सकता है।
पर्यटकों को लुभाने के लिए इस क्षेत्र में ऐसे कई स्थान हैं, लेकिन उचित व्यवस्था न होने के कारण वे यहां आने से कतराते हैं। देवगढ़ में आने वाले पर्यटकों की सुविधा के लिए अब शासन ने यहां 15.5 करोड़ रुपये की लागत से एक हेलीपोर्ट बनाने का प्रस्ताव जिला प्रशासन से मांगा है। जिला प्रशासन जमीन चिन्हित करने में जुटा है। जमीन चिन्हित होने के बाद इसे शासन स्तर पर भेजा जाएगा। देवगढ़ में हेलीकॉप्टर उतरने से यहां अधिक संख्या में पर्यटक आने शुरू होंगे, इससे क्षेत्र के लोगों को रोजगार के साधन उपलब्ध होंगे।
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देवगढ़ क्षेत्र के आसपास है ये पर्यटन स्थल
देवगढ़ के आसपास कई पर्यटन स्थल हैं। देवगढ़ में ही प्राचीन देशावतार मंदिर, जैन मंदिरों की शृंखला, बेतवा नदी का करकरावल जलप्रपात, महावीर स्वामी वन्य जीव अभयारण, जिसमें लुप्त होने की कगार पर पहुंच चुके गिद्धों के लिए सैंक्चुअरी कॉलोनी बनाई गई है। इसके साथ यहां पुरातत्व संग्रहालय में रखी प्राचीन मूर्तियां, बेतवा नदी के किनारे स्थित किला, महाभारत कालीन रणछोर धाम आदि दर्शनीय स्थल हैं।
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देवगढ़ क्षेत्र में हेलीपोर्ट बनाने का प्रस्ताव शासन ने मांगा है और जमीन चिन्हित करने को कहा है। जमीन की तलाश शुरू कर दी गई है। हेमलता, पर्यटन अधिकारी/सचिव जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद