लॉकडाउन के कारण मटकों को बाजार में बेचने की अनुमति नहीं है, इस कारण घरों के बाहर ही मटके लगा दिए गए हैं, ताकि लोग गर्मी के सीजन में ठंडे पानी के लिए मटकों का प्रयोग कर सकें और ग्राहकों को मटके खरीदने के लिए इधर- उधर परेशान न होना पड़े। गर्मी तेज पड़ने लगी है। कोरोरा वायरस के कारण लोग फ्रिज के पानी से परहेज कर रहे हैं। इस कारण लोगों को मटके की तलाश है, लेकिन बाजार में मटके नहीं मिल रहे हैं। इस कारण वह कुम्हारों के मोहेल्लों में जा रहे हैं, वहां पर घरों के बाहर मटकों के ढेर लगे हुए हैं। ग्राहक वहीं से मटका खरीद रहे हैं। बाजार में मटके नजर नहीं आ रहे हैं। केवल वर्णी चौराहा और कलेक्ट्रेट के सामने ही मटके बिक रहे हैं। मटकों का दाम भी इस बार महंगा है, जो मटका पिछले साल तक पचास रुपये में मिल रहा था, अब वह अस्सी रुपये तक का मिल रहा है। ऐसे में मटकों के दाम करीब दोगुने हो गए हैं।