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बालाबेहट में बांध बनाने में शासन ने एक कदम और बढ़ाया, जूलोजिकल विभाग के वैज्ञानिक पहुंचे बालाबेहट

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ललितपुर। बालाबेहट बांध परियोजना के लिए जियोलॉजिकल विभाग की टीम ने तीन स्थानों का भू सैंपल लिया। सैंपलों को जांच के लिए वह अपने साथ लखनऊ स्थित जियोलॉजिकल विभाग की प्रयोगशाला ले गए। जियोलॉजिकल विभाग की रिपोर्ट आने के बाद भू स्थल का चयन किया जाएगा। इसके बाद बांध की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
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बालाबेहट रबर डैम परियोजना निरस्त होने के बाद अब नई बांध परियोजना का काम तेजी से शुरू कर दिया है। अधीक्षण अभियंता सिंचाई निर्माण मंडल झांसी ने बालाबेहट क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कर छोटे बांधों व चेकडैम बनाने का प्रोजेक्ट शासन को भेजा था। शासन द्वारा जमीन की गुणवत्ता के लिए जियोलॉजिकल विभाग के वरिष्ठ भू वैज्ञानिक को जनपद भेजा। वरिष्ठ भू वैज्ञानिक अजय शंकर पांडेय बालाबेहट सिंचाई निर्माण खंड तृतीय के सहायक अभियंता और जूनियर इंजीनियर की टीम के साथ पहुंचे। भू वैज्ञानिक ने इस क्षेत्र में नाप-जोख की और मिट्टी व पत्थर के नमूने लिए। विभागीय सूत्रों की माने तो तीन स्थानों के नमूने लिए गए हैं। जहां पर सिंचाई विभाग द्वारा संभावित बांध का स्ट्रक्चर खड़ा करना प्रस्तावित किया गया है। एकत्रित किए गए पत्थर व मिट्टी के नमूने भू वैज्ञानिक अपने साथ लखनऊ स्थित जियोलॉजिकल विभाग की प्रयोगशाला जांच के लिए ले गए। जियोलॉजिकल विभाग की रिपोर्ट आने के बाद भू स्थल का चयन किया जाएगा। इसके बाद पत्थर की जांच के लिए वहां पर बोरिंग कर भूमि के अंदर दबी चट्टानों का परीक्षण कर उनकी क्षमता आंकी जाएगी। शासन व सिंचाई विभाग द्वारा जिस तेजी से काम किया जा रहा है। उससे ऐसा प्रतीत होता है कि बालाबेहट क्षेत्र के लोगों को जल्द ही नई बांध परियोजना की सौगात मिल जाएगी। यह पूरा क्षेत्र पहाड़ी है। बारिश का पानी छोटे-छोटे नालों से होकर निचले इलाकों में चला जाता है। जिससे ग्रीष्म ऋतु व रबी के मौसम में क्षेत्रवासियों को पानी नहीं मिलता है। इस बांध परियोजना के बन जाने से क्षेत्रवासियों को वर्ष भर पानी उपलब्ध हो जाएगा। इसलिए इस क्षेत्र के कृषि विकास के लिए यह बांध परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
तीन सौ हेक्टेयर में बांध बनाए जाने की योजना
करीब 300 हेक्टेयर में बनाए जाने वाले बांध की जलस्तर क्षमता करीब 5-8 मिलियन क्यूबिक मीटर की होगी। इस बांध में पेयजल परियोजना के लिए पानी सुरक्षित रखा जाएगा। बांध से कैनाल न निकालकर प्रेशर पाइप से सिंचाई के लिए पानी देने की योजना सिंचाई विभाग ने बनाई है।
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जियोलॉजिकल विभाग लखनऊ से भू वैज्ञानिक जनपद आए थे। उन्होंने बालाबेहट क्षेत्र में प्रस्तावित बांध के लिए मिट्टी व पत्थर के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला ले गए। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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इं. सतीश बुंदेलकर, सहायक अभियंता सिंचाई निर्माण खंड तृतीय
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