सिलावन (ललितपुर)। बाजार में ठेलों पर लटक रहे केले नीचे का हिस्सा पीला, फिर हल्का हरा और उपर से गहरा हरा दिखाई देता हैं मतलब समझ जाए कि वह केमिकल से पका हैं। लोगों की सेहत बिगाड़ने के लिए रासायनिक क्रिया से पकाने का खेल बड़े पैमाने पर चल रहा है। जिले में भी ठेले पर ऐसे केले लटके आसानी से देखे जा सकते हैं। कार्रवाई नहीं होने से इस गोरखधंधे में लगे लोगों के हौसले बुलंद हैं।
केला सेहत के लिए फायदेमंद है। त्योहारी सीजन में मांग अधिक होने व मुनाफाखोरी के चलते बाजार में केमिकल से पका कर केले बेचे जा रहे हैं जो सेहत के लिए बेहद हानिकारक हैं। केमिकल से पके हुए केले सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। केले ज्यादातर केल्शियम कार्बाइड से पकाए जा रहे हैं। जो अत्यंत ही घातक होता हैं। कारोबारी केल्शियम कार्बाइड के घोल में केले को डूबाकर रख देते हैं जो सात से आठ घंटो में पीला हो जाता हैं। जानकारों की माने केल्शियम कार्बाइड कारसीनोजैनिक होता हैं तो कैंसर का कारक बनाता हैं। ऐसे जहर से नहाए हुए केलों के सेवन करने से इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता हैं, आंत की बीमारियां, डिहाइड्रेशन, डायरिया, पेप्टिक अल्सर, आंखों की रोशनी पर भी फर्क पड़ता हैं। बाजार मुनाफा कमाने के चक्कर में केले जैसे फलों को जल्दी पकाने के लिए धडल्ले से केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा हैं जो सेहत के लिए घातक सिद्ध हो सकते हैं। जानकार तो यह तक बताते हैं कि केमिकल वाले फल गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद नुकसान दायक हैं। इससे गर्भपात भी हो सकता हैं। महरौनी के बाजार में ठेलों पर लटक रहे केले नीचे का हिस्सा पीला, फिर हल्का हरा और उपर से गहरा हरा आसानी से देखा जा सकता हैं। ऐसा नहीं हैं कि अफसर इससे अनभिज्ञ हो बावजूद इसके महरौनी के बाजार में केमिकल से पके हुए केलो को खुलेआम और धडल्ले से बेचा जा रहा हैं।
केमिकल युक्त फल खाने से पेट खराब हो जाता हैं, मुंह में छाले हो जाते हैं फलों में कुदरती स्वाद खत्म हो जाता हैं और फल खाने से अरूचि हो जाती हैं। साथ ही इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। डिहाइड्रेशन, डायरिया, पेप्टिक अल्सर के साथ साथ आंखो की रोशनी पर भी असर पड़ता हैं। इतना ही नहीं गर्भवती महिलाओं पर भी इसका असर पड़ता है यहां तक कि गर्भपात भी हो सकता हैं। -डॉ. राजेंद्रभूषण पटेरिया- होम्योपैथिक चिकित्सक( सामुदायिक चिकित्सालय महरौनी)
कार्बाइड से पके केले को कैसे पहचाने
दरअसल नैचुरल तरीके से पके हुए केले में हल्के भूरे और काले रंग के धब्बे होते हैं और खाने मे मीठे होते हैं, इनका छिल्का गहरा पीला और दागदार होता हैं साथ ही पतला होता हैं, ऐसे केलो का डंठल काला दिखाई देता हैं। वही कार्बाइड या केमिकल आदि से पके हुए केले एकदम प्लेन और हल्के पीले रंग के होते हैं इसका छिल्का मोटा होता हैं उपर से इसका डंठल हरा दिखाई देता हैं।
लगातार बाजार में निगरानी की जा रही हैं अभी महरौनी में कोल्ड स्टोरेज केले आ रहे हैं। केमिकल से पके हुए केले बिक रहे हैं ऐसा संज्ञान में नहीं आया हैं। यदि ऐसा हैं तो कार्रवाई की जाएगी।-प्रशांत मलैया-जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी, ललितपुर