अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। नेहरू नगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन कथावाचक पं. अरविंद व्यास ने सुदामा चरित की कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सुदामा संसार में सबसे अनोखे भक्त रहे हैं। वह जीवन में जितने गरीब नजर आए, मन से वह उतने ही धनवान थे।
कथा व्यास ने कहा कि सुदामा ने अपने सुख व दुखों को भगवान की इच्छा पर छोड़ दिया था। श्रीकृष्ण और सुदामा के मिलन का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। उन्होंने कहा कि जब सुदामा भगवान श्रीकृष्ण से मिलने आए तो उन्होंने सुदामा के फटे कपड़े नहीं देखे, बल्कि मित्र की भावनाओं को देखा। मनुष्य को अपना कर्म नहीं भूलना चाहिए। अगर सच्चा मित्र है तो श्रीकृष्ण और सुदामा की तरह होना चाहिए। जीवन में मनुष्य को श्रीकृष्ण की तरह अपनी मित्रता निभानी चाहिए। समापन विधि-विधान से हवन हुआ। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया। इस दौरान मुख्य यजमान बाबूलाल, कुसुम यादव, रामसिंह, कुंवर सिंह, रामसिंह, रामबाबू यादव, संतोष विश्वकर्मा, विनोद आदि मौजूद रहे ।