संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। यहां के अधिकांश पर्यटन क्षेत्र जंगलों में हैं। वन विभाग की सीमा लगने के कारण यहां के पहुंच मार्ग बनाने के लिए कई बार प्रशासन ने धनराशि शासन से मांगी, लेकिन पर्यावरण विभाग की एनओसी न मिलने से इन सड़कों का निर्माण नहीं हो पाया है। अब जिला प्रशासन ने वन विभाग को कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने वन विभाग से वन मार्गों की सूची मांगते हुए उनके निर्माण की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। प्रथम चरण में बंदरगुढ़ा से देवगढ़ तक जाने वाले आठ किलोमीटर मार्ग निर्माण की कार्ययोजना तैयार कर उसका स्टीमेट बनाने के निर्देश दिए। इसके अलावा अन्य वन मार्गों की सूची मांगी गई है, साथ ही इनके जीर्णोद्धार के लिए कार्ययोजना मांगी है।
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होगा पर्यटन विकास
अभी तक बंदरगुढ़ा से देवगढ़ जाने के लिए आम सड़क ही उपलब्ध है। यह करीब 15 किलोमीटर दूर पड़ता है, लेकिन बंदरगुढ़ा से देवगढ़ जाने के लिए एक पुराना वन मार्ग भी है। इस मार्ग से देवगढ़ की दूरी मात्र आठ किलोमीटर ही रह जाती है। इस मार्ग का जीर्णोद्धार होने से लोग आसानी से वन क्षेत्र का प्राकृतिक सौंदर्य व बेतवा का मनोरम दृश्य देख सकेंगे।
ये हैं वनमार्ग
- सैपुरा से बंजरिया घाटी होते हुए रणछोर धाम वनमार्ग
- डुंगरिया तिराहे से नृसिंह मंदिर एवं कपूरी घाटी से दूधई जैन मंदिर तक वनमार्ग
- लखंजर व पापड़ा वन क्षेत्र में वन मार्ग
- दूधई में रॉक कट प्रतिमा तक वनमार्ग तक निर्माण
- कनकद्दर फॉल क्षेत्र का वन मार्ग निर्माण
- करकरावल फॉल क्षेत्र तक पहुंच वन मार्ग
- पांडव वन क्षेत्र का वन मार्ग
- बंट वाटर फॉल तक पहुंच वन मार्ग
- अमझरा से देवगढ़ तक वन मार्ग
जिलाधिकारी ने बंदरगुढ़ा से देवगढ़ तक जाने वाले वन मार्ग की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। स्टीमेट तैयार कर जिला प्रशासन को सौंप दिया जाएगा। अन्य वन मार्ग निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।
गौतम सिंह, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी।