- घंटाघर पर लगी शिलापट्टिका पर 154 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की गौरव गाथा, इनमें तीन के पिता के नाम के आगे लिखा है अज्ञात
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। बुंदेलों की धरती पर आजादी के दीवानों के सम्मान की बानगी देखिए। शहर के घंटाघर में लगी शिलापट्टिका पर तीन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के पिता के नाम के आगे अज्ञात लिखा है। यह स्थिति 13 सालों से है। अबतक प्रशासन इस गलती को दुरुस्त नहीं कर पाया है।
शिलापट्टिका पर 154 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नामों का उल्लेख है। इनमें प्यारेलाल यादव, ग्राम खरकौन, विशेश्वर सिंह तालबेहट और किशोर सिंह, ग्राम जखौरा के पिता के नाम अज्ञात लिखे गए हैं।
प्रशासन ने तब कहा था... जल्दबाजी हुई
प्रशासन की ओर से पहले यह बताया गया कि यह चूक जल्दबाजी में हुई। लेकिन 13 साल बाद भी स्थिति जस की तस ही है।
डॉ. लोहिया ने 1960 में किया था घंटाघर का उद्घाटन
आजादी के बाद जनपद मुख्यालय पर नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. शादीलाल दुबे ने घंटाघर की नींव रखी। इसका निर्माण 1959 में पूर्ण हुआ। उद्घाटन के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया को आना था। उन्होंने इच्छा जताई कि घंटाघर की घड़ी में हिंदी के अंक हो। फिर कलकत्ता के कारीगरों से घड़ी तैयार कराई गई। इसके बाद डॉ. लोहिया ने इसका उद्घाटन 20 अप्रैल 1960 में किया। वर्ष 2001 में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और तत्कालीन विधायक डॉ. अरविंद जैन ने घंटाघर की दीवारों पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की पट्टिका लगाने का प्रस्ताव रखा था।
डीएम की फोटो
मेरी अपील है कि इन स्वतंत्रता सेनानियों के गांव के लोग आगे आएं और प्रशासन को जानकारी उपलब्ध कराएं। ताकि यह अभिलेख दुरुस्त कराए जा सके। इसके अलावा प्रशासनिक पत्रावली में भी रिकॉड खंगाला जाएगा। जल्द ही यह चूक सुधार ली जाएगी।
- अक्षय त्रिपाठी, जिलाधिकारी