ललितपुर। निर्यापक श्रमण मुनि सुधा सागर महाराज ने कहा कि धर्म की क्रियाओं में चमत्कार और अभाव में आनंद है। जैन दर्शन कहता है रोटी खाने में सुख है लेकिन धर्म कहता है कि रोटी न खाकर उपवास रखने में आनंद है। उपवास की अनुभूति धर्मात्मा कर सकता और आनंद को पा सकता है। वह सोमवार को अभिनंदनोदय तीर्थ में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे।
मुनिश्री ने धर्म का मर्म समझाते हुए कहा कि धर्म की क्रियाओं को समझो। प्रभु की भक्ति व अभिषेक के महत्व को समझो मैं कौन हूं। उन्होंने जनपद में अभिनंदनोदय तीर्थ के पंचकल्याणक महोत्सव के आयोजन को पुण्य का कारण बताया और इस महामहोत्सव को अपने परिवार का उत्सव मानते हुए नाते रिश्तेदारों को इस पुण्य में सहभागी बनाओ। धर्मसभा के प्रारंभ में अभिनंदनोदय तीर्थ पर मूलनायक अभिनंदननाथ भगवान का पूजन और शांतिधारा श्रावकों ने की। शांतिधारा का पुर्ण्याजन अमित जैन परिवार एवं राकेश जैन परिवार को मिला। धर्मसभा का संचालन महामंत्री डॉ.अक्षय टडैया ने किया।
पड़गाहन का पुर्ण्याजन मिला
निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज को नवधा भक्ति पूर्वक पड़गाहन का पुर्ण्याजन जिनेंद्र जैन, विकास जैन परिवार, मुनि पूज्यसागर महाराज का पड़गाहन अशोक जैन, सम्यक जैन परिवार, ऐलक धैर्यसागर महाराज का पड़गाहन आरके पाटनी, सुशीला पाटनी परिवार और गंभीर सागर महाराज का पड़गाहन मदनलाल, विवेक जैन ने किया।