फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lalitpur News: मोबाइल और इंटरनेट का अधिक प्रयोग से बच्चों को बना रहा रोगी

विज्ञापन
विज्ञापन
ललितपुर। कोविड काल में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बच्चों तक पहुंचा मोबाइल व इंटरनेट अब उनकी परेशानियां बढ़ा रहा है। बच्चे अब भी रोजाना आठ से दस घंटे तक मोबाइल का प्रयोग कर रहे हैं। मोबाइल का अधिक प्रयोग से बच्चों में नींद पूरी न होने से चिड़चिड़ापन, क्रोध, भूख में कमी और याददाश्त कमजोरी आदि अन्य मानसिक समस्याएं बढ़ा रहा है। मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान के संयोजक डॉ. संजीव शर्मा सहित नेत्र व बाल रोग विशेषज्ञों ने भी चिंता जताई है।
विज्ञापन

जानकारी के मुताबिक कोविड काल में करीब 60 प्रतिशत से अधिक बच्चों ने मोबाइल का प्रयोग करना शुरू कर दिया है। अभिभावकों को बच्चों के लिए मोबाइल देना मजबूरी हो गई है। बच्चे कक्षा लेने के बाद भी आठ से दस घंटे तक मोबाइल का प्रयोग करने लगे। इस दौरान माता पिता निगरानी भी नहीं रख पाते हैं। परिजनों के साथ बातचीत करते समय भी मोबाइल से अपनी नजरें नहीं हटाना आदत में शुमार हो गया है। अब यह मोबाइल का अधिक प्रयोग माता-पिता की परेशानी बन रहा है।
सोशल मीडिया ने बिगाड़ी बच्चों की आदत
मोबाइल व इंटरनेट के अधिक प्रयोग से बच्चे मोबाइल गेम, कार्टून, किशोरों में सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम, वेब सीरीज, युवाओं में ऑनलाइन जुआ खेलना, वेब सीरीज, सोशल मीडिया व अन्य अश्लील बेबसाइटों की लत लग गई है। साथ ही समय के साथ मानवीय ऊर्जा की बर्बादी हो रही है, साथ ही मोबाइल डाटा का दुरुपयोग भी हो रहा है।
विज्ञापन

10 में तीन बच्चे मोबाइल के कारण हो रहे बीमार
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष कुमार ने बताया कि मोबाइल ज्यादा प्रयोग करने से बच्चों में चिड़चिड़ापन, क्रोध, नींद में कमी, भूख न लगना, एकाग्रता में कमी, झूठ बोलने की आदत, शारीरिक सक्रियता में कमी, मोटापा आना, याददाश्त कमजोर होना, पढ़ाई में दिलचस्पी न लेना आदि समस्याएं आ रही हैं। इससे शिक्षा व परीक्षा में खराब प्रदर्शन आदि मानसिक समस्याएं हो रही हैं। यही नहीं मोबाइल लेने पर बच्चे चुप्पी साध लेते हैं। माता पिता से बात करना बंद कर देते हैं, तो कई बच्चे क्रोधी व्यवहार दिखाते हैं, जिसके कभी कभी बहुत गंभीर परिणाम सामने आते हैं।
मोबाइल का अधिक प्रयोग बच्चों की आंखों पर असर डाल रहा है। अस्पताल में आने वाले मरीजों में पांच वर्ष से 18 साल तक के करीब 40 फीसदी बच्चे व युवाओं की आंखों में जलन, सिरदर्द और रेटिना सूखने की समस्या आ रही है। इसलिए मोबाइल का प्रयोग कम और सावधानी पूर्वक करना चाहिए। -डॉ. बृजेश वर्मा, नेत्र रोग विशेषज्ञ जिला अस्पताल
बच्चों को करें जागरूक
मोबाइल के दुरुपयोग से शिक्षा, परीक्षा, शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले कुप्रभावों के बारे में बच्चों को बताएं। बच्चों को परिवार, संबंधियों व मित्रों के साथ समय बिताने के लिए समझाएं। बच्चों में कोई अच्छे शौक विकसित करें। बच्चों को आउटडोर गेम जैसे क्रिकेट, बैडमिंटन, टेनिस, फुटबॉल, वॉलीबाल आदि खेलने के लिए प्रेरित करें। बच्चों की इंटरनेट एक्टिविटीज पर लगातार नजर बनाए रखें। - डॉ. संजीव शुक्ला, संयोजक मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान नेहरु महाविद्यालय
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें