संवाद न्यूज एजेंसी
मड़ावरा (ललितपुर)। वर्णीनगर में आयोजित धर्मसभा में अक्षय सागर ने कहा कि जीवन में किए गए कर्मों को प्रत्येक को भोगना पड़ता है। संसारी एक गलती करता है, लेकिन उसे कई भवों तक भोगना पड़ता है, इसलिए हमें कर्म ऐसे करना चाहिए कि आगे भवों में भोगना न पड़े। हमें दया के क्षेत्र में काम करना है। अगर हम एक गाय जिसे कसाई काटने को लेकर जा रहा, उसे अगर बचा लिए तो उसका पुण्य कर्म सबसे ज्यादा मिलेगा। बुधवार को हर्षोल्लास से विमानोत्सव यात्रा निकालकर समापन किया गया।
महावीर विद्याविहार में आचार्य विद्यासागर महा मुनिराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि अक्षय सागर एवं ऐलक उपशम सागर के मंगल सानिध्य में विमानोत्सव का आयोजन किया गया। पुराना बाजार स्थित नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर से विमानोत्सव शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ। नेमिनाथ मंदिर पुराना बाजार, बजाज का मंदिर, पार्श्वनाथ युगल मंदिर, नया मंदिर, नायक का मंदिर, चंद्रप्रभु मंदिर, वैद्य जी का मंदिर एवं महावीर जिनालय के कुल आठ विमान शामिल हुए, जिसमें भक्तिभाव पूर्वक श्री जी की प्रतिमा को विराजमान किया गया। विमानों को श्रद्धालु जन अपने कंधों पर लेकर चल रहे थे। शोभायात्रा में जैन समाज के बच्चे अखाड़ा प्रदर्शन तो दिव्यघोष का वादन करते हुए चल रहे थे।
शोभायात्रा के जलविहार स्थल महावीर विद्याविहार पहुंचने पर मुनि श्री ने मंत्रोच्चार के साथ भगवान जिनेंद्र देव का अभिषेक शांतिधारा कराया। प्रवचन के उपरांत पर्यूषण पर्व के दौरान तप उपवास के माध्यम से धर्म प्रभावना करने वाले सभी श्रद्धालुओं व प्रभारी निरीक्षक उदयभान गौतम सहित पुलिस बल का सम्मान किया गया। समापन पर सभी विमानों को गाजे बाजे के साथ पुनः यथास्थान मंदिरों में ले जाया गया, जहां पुजारियों ने श्री जी को वेदियों पर विराजमान किया।
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महरौनी। मंदिरों में भगवान जिनेंद्र के अभिषेक के साथ दशलक्षण धर्म की आराधना की गई। पर्यूषण पर्व के अंतिम दिन श्रद्धालुओं ने एक दूसरे से क्षमा याचना की और जाने-अनजाने की गलतियों के लिए माफी मांगी।
सुबह भगवान जिनेंद्र का अभिषेक पूजन किया और दशलक्षण महापर्व के समापन पर विमान जी की शोभायात्रा निकाली गई। विमान यात्रा का शुभारंभ बड़े मंदिर से प्रारंभ हुआ जो मुख्य मार्ग से होते हुए श्री यशोदय तीर्थ पहुंचा। नगर पंचायत अध्यक्ष नीलम बड़ोनिया सहित श्रद्धालुओं ने विमान की आरती उतारी और आर्यिका रत्न धारणामति माताजी ससंघ के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। शोभायात्रा यशोदय तीर्थ पर पहुंची जहां भगवान जिनेंद्र का अभिषेक किया गया। अभिषेक करने का सौभाग्य सुनील डेवडिया, ऋषभ कठरया, राकेश पठा को प्राप्त हुआ। ध्वजारोहणकर्ता अभिनंदन बाजा, आनंद सराफ, राजेश मलैया, शिखर सिलौनया, राजा चौधरी, अंकित चौधरी, अनिल जैन एवं नितिन शास्त्री रहे।
धर्मसभा में आर्यिका धारणामति माता ने कहा कि क्षमा धर्म विश्व शांति का प्रबल मंत्र है। क्रोध न करना ही क्षमा का दूसरा नाम है। क्षमा मांगने की नहीं स्वयं के अंदर उतारने की आवश्यकता है। जैसे रूप का आभूषण गुण है और गुण का आभूषण ज्ञान है। उसी तरह ज्ञान का आभूषण क्षमा है। क्षमा से विश्वव्यापी समस्याओं का समाधान हो सकता है।
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तालबेहट-पवा। बुंदेलखंड के प्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र पवागिरि में क्षमावाणी महापर्व मनाया गया। सुबह भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने पवागिरि पहुंचकर अतिशय युक्त चमत्कारी बाबा मूलनायक भगवान पारसनाथ स्वामी का मस्तिकाभिषेक कर विश्वशांति की मंगल भावना के साथ शांतिधारा एवं पूजन विधान किया।
दोपहर में आचार्य श्री का चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, ध्वजारोहण के बाद वार्षिक कलषाभिषेक एवं फूलमाल का आयोजन हुआ। वक्ताओं ने कहा कि उत्तम क्षमा दशलक्षण का पहला धर्म है, जिसे सभी को अपने जीवन में धारण करना चाहिए। क्षमा वीरों का आभूषण है, जिससे व्यक्ति महान बनता है।