झांसी। वित्तीय वर्ष के अंतिम पड़ाव पर पहुंचते ही भुगतान के मामले में साल भर सुस्त रहने वाले महकमे भी एकाएक सक्रिय हो गए हैं। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि मार्च में अलग-अलग विभागों के 400 करोड़ के बिल कोषागार पहुंचे हैं। इससे कोषागार में भी गहमागहमी बढ़ी हुई है। बृहस्पतिवार देर शाम तक कोषागार में भुगतान की प्रकिया जारी रही।
वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले शासन की ओर से विभागों को साल भर किए गए कामों का अवशेष बजट जारी किया जाता है, जिसके चलते मार्च माह की शुरुआत से ही विभाग अपने अवशेष देयकों का ब्योरा इकट्ठा करने के लग जाते हैं। इनके बिल बनाकर कोषागार को सौंपे जाते हैं। शासन द्वारा जारी किया गया बजट कोषागार के जरिये विभागों को उपलब्ध कराया जाता है। वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले यह काम पूरा नहींं होने पर भुगतान अगले साल के लिए लटक जाता है। बाद में इसे हासिल करने के लिए विभागों को खासी मशक्कत करनी पड़ जाती है।
वित्तीय वर्ष 2022-23 समाप्त होने में चंद दिन ही शेष हैं। लेकिन, साल के आखिरी माह मार्च की शुरुआत से ही कोषागार में विभागों की ओर से बिल प्रस्तुत किए जाने लगे थे। एक से 30 मार्च तक अलग-अलग विभाग की ओर से 400 करोड़ रुपये से अधिक के पांच हजार से ज्यादा बिल भुगतान के लिए प्रस्तुत किए जा चुके हैं। शुक्रवार तक येे आंकड़ा 500 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है।
पीडब्ल्यूडी ने मांगा सर्वाधिक भुगतान
झांसी। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की ओर से सर्वाधिक तकरीबन 90 करोड़ रुपये के बिल प्रस्तुत किए गए हैं। इसके अलावा सिंचाई विभाग ने तकरीबन 65 करोड़, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा के तकरीबन 20 करोड़, बेसिक शिक्षा विभाग के 18 करोड़ के बिल आए हैं। इसके अलावा अन्य विभागों ने भी अपने बिल प्रस्तुत किए हैं।
सभी विभाग अपने देयकों के भुगतान के लिए बिल प्रस्तुत कर रहे हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की गाइड लाइन के अनुसार 31 मार्च की रात आठ बजे तक ही बिल स्वीकृत किए जाएंगे। इसके बाद बिल प्रस्तुत करने वालों का भुगतान अगले वित्तीय वर्ष में होगा। - संजीव कुमार सरावगी, सहायक कोषाधिकारी।