- अटामंदिर में आचार्यश्री निर्भय सागर का चल रहा है ससंघ चर्तुमास
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। आचार्य श्री निर्भयसागर ने जैन दर्शन में गुरुपूर्णिमा की महिमा बताई। उन्होंने कहा गुरु के माध्यम से ही धर्म का बोध होता है। गुरु अपने आप में पूर्ण मां है, यह स्वयं पूर्णिमा शब्द कहता है। सच्चा गुरु वही है जो शिष्य को अनर्थ से बचाए और परमार्थ में लगाए। असंयम से संयम में, भोग से योग में, राग से वैराग्य में, आधुनिकता में ले जाए। गुरु को ब्रह्म इसलिए कहते हैं क्योंकि गुरु ही शिष्य के जीवन का अच्छा सृजन करते हैं। गुरु ही शिष्य के पापों और दुखों का संहार करते हैं। गुरुपूर्णिमा पर आहारदान श्रावक के लिए श्रेष्ठ दान बताते हुए आचार्यश्री ने कहा इस दिन जो गुरु को आहारदान देता है, उसको असीम पुण्य का संचय होता है और पाप धुलते है। गुरुपूर्णिमा पर पार्श्वनाथ जैन अटामंदिर में आचार्यश्री की अष्टमंगल द्रव्यों से पूजन हुई, पादप्रक्षालन किया गया। आचार्यश्री निर्भयसागर महाराज ससंघ की आहारचर्या हुई, जिसमें आचार्यश्री को आहारदान का पुण्यार्जन अनिल कुमार, अक्षय अलया परिवार को मिला, जहां सैकड़ों की संख्या में श्रावको ने आहार दान कर पुण्य अर्जन किया। आचार्यश्री के दर्शनार्थ भारी संख्या में अनेक भक्तगण श्रावक ललितपुर पहुंचे, जहां उन्होंने आशीर्वाद ग्रहण किया। नगर में आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज का जैन अटामंदिर में चातुर्मास शुरू हो गया है, आचार्यश्री संघ में मुनि शिवदत्त सागर महाराज, मुनि सुदत्त सागर महाराज, मुनि भूदत्त सागर महाराज मुनि पदमदत्त सागर महाराज, मुनि वृषमदत्त सागर महाराज, शुल्लक चन्ददत्त सागर महाराज एवं श्रीदत्तसागर महाराज विराजमान हैं, जिनके माध्यम से अपूर्व धर्मप्रभावना हो रही है।