ललितपुर। क्षेत्रपाल मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव सुधासागर महाराज ने कहा जिंदगी अमूल्य है इसको अभिशप्त नहीं बनाओ। हमें जन्म लेने का अधिकार है लेकिन मरने का नहीं। मनुष्य को अभी इच्छामृत्यु का अधिकार नहीं मिला है। उन्होंने कहा हमें जन्म लेने के बाद मुनि पद धारण करने का अधिकार मिला है। यदि ऐसे में किसी के प्राणों के घात का विचार आए तो समझो हमें एक साधू की हत्या का दोष लगता है।
उन्होंने कहा किस्मत में कोई दुख आए तो उसे भूलो और विचार करो जिस प्रभु की कृपा से मनुष्य जन्म मिला वह दुख दे ही नहीं सकता। उन्होंने कहा जीवन को पवित्र निर्मल बनाओ और कोई बुरे परिणाम न आए ऐसी कामना करो। प्रात:काल मूलनायक वेदिका पर अभिषेक के उपरांत शांतिधारा मुनि सुधा सागर महाराज के मुखारबिंद से हुई। जिसका पुर्ण्याजन सुंदरवाई डॉ.पारस जैन भायजी परिवार, चंद्रकुमार लोहिया परिवार राजेंद्र जैन शिवपुरी परिवार ने किया। इसके उपरांत आचार्य श्री के चित्र का अनावरण श्रावक श्रेष्ठी परिवार द्वारा किया गया। इस मौके पर आशीष जैन, मुकेश जैन,सुशील जैन ने मुनि श्री को श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद ग्रहण किया। मुनि संघ की आहारचर्या के लिए श्रावक अपने घरों में चौका लगाकर पड़गाहन के लिए क्षेत्रपाल मंदिर पहुंचते हैं। जहां भक्तिपूर्वक पड़गाहन की क्रियाएं होती हैं। जिसको देखकर श्रावक पुर्ण्याजन करते हैं।
आहारदान का मिला सौभाग्य
मुनि सुधा सागर महाराज को शनिवार को आहारदान ब्रह्मचारिणी मंजू नई बस्ती, नगर गौरव पूज्य सागर महाराज को विजय जैन विदिशा, ऐलक धैर्य सागर महाराज को राकेश जैन रसिया परिवार एवं क्षुल्लक गंभीर सागर महाराज को राहुल जैन, दर्शन जैन परिवार को पड़गाहन का सौभाग्य मिला। सायंकाल जिज्ञासा समाधान में मुनि सुधा सागर महाराज श्रावकों की जिज्ञासा का समाधान कर रहे हैं।
व्यवस्थाओं में लगे संगठन
मुनि संघ की व्यवस्थाओं को संयोजित करने में दिगंबर जैन पंचायत समिति के पदाधिकारियों के साथ आचार्य विद्यासागर व्यायामशाला, स्याद्वाद बर्द्धमान सेवा संघ, भारतीय जैन मिलन ,आदिनाथ सेवा संघ, जैन एंबुलेंस सेवा संघ,जैन सेवा समिति, जनक जननी वृद्धाश्रम, जैन शिक्षक समूह, गुरू प्रभावना संघ, वीर सेवा संघ, वाहुवलि सेवा संघ का सक्रिय योगदान मिल रहा है।