ललितपुर। क्षेत्रपाल मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव सुधासागर महाराज ने कहा कि दुख से घबराकर धर्म नहीं करना। जो परेशान होकर मंदिर आते हैं वह भक्त नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मजबूरी में कोई भी कार्य करने पर सफल नहीं होते। व्यक्ति जब परिवार में सुखी है और वैराग्य आए तभी साधू बनना श्रेयस्कर है। पारिवारिक सांसारिक समस्याओं से ग्रसित होकर सन्यासी होने वाला कभी सच्चे सुख को नहीं पा सकता। उन्होंने कहा कि यदि असमर्थ अक्षम हो ऐसे में कभी साधू नहीं बनना क्योंकि पुण्यशाली वही है जिसे संसार की वस्तुओं से विरक्ति आए और वैरागी बन जाए। साधू जीवन को सुखमय बताते हुए कहा कि इसमें पुण्य ही पुण्य है।
मुनि श्री ने कहा कि ईमानदारी की सदैव जीत होती है। जो सारे जगत के लिए मरने मिटने वाला है उनका ही अहित हो रहा है। जो भगवान की भक्ति नहीं कर रहे वह सफल हो रहा है। जो सज्जन बने वो दुर्जन बन रहे हैं क्योंकि उसे सज्जन धर्मात्मा बनकर कोई फायदा नहीं हुआ। उन्होंने रावण का स्मरण सुनाते हुए कहा कि ईमानदारी ही जीतती है। रावण अंत में हारता है और रामजी विजयी होते हैं। उन्होंने कहा परेशान वो नहीं जो निकम्मा है, परेशान वो है जो पूरी मेहनत से कार्य करने पर सफल नहीं होता है। प्रात:काल क्षेत्रपाल मंदिर में मूलनायक अभिनंदन नाथ की वेदिका पर अभिषेक की मांगलिक क्रियाएं हुईं। इसके उपरांत शांतिधारा मुनि सुधासागर महाराज के मुखारबिंद से हुई। धर्मसभा प्रारंभ होने के पहले आचार्य विद्यासागर महाराज के चित्र का अनावरण किया गया।
श्रावकों की जिज्ञासा का किया समाधान
शुक्रवार को मुनि सुधासागर महाराज, नगर गौरव पूज्य सागर महाराज एवं ऐलक धैर्य सागर महाराज का उपवास रहा। सायंकाल जिज्ञासा समाधान के उपरांत भक्तिमय आरती पुर्ण्याजक परिवार सहित की। सायंकाल जिज्ञासा समाधान में मुनि सुधासागर महाराज श्रावकों की जिज्ञासा का समाधान कर रहे है।
ये रहे मौजूद
ब्रह्मचारी महावीर जैन, मनोज भैया के अतिरिक्त जैन पंचायत अध्यक्ष अनिल जैन अंचल, महामंत्री डॉ.अक्षय टडैया, मंदिर प्रबंधक राजेंद्र जैन, पंकज जैन मोदी, शीलचंद अनौरा, अखिलेश गदयाना, धार्मिक संयोजक मनोज, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, कमलेश सराफ, जीवन जैन, विजय जैन, संजीव जैन, जिनेंद्र जैन, राहुल जैन, देवेंद्र पंसारी, अमित प्रिय जैन, अंकुर जैन, अविनाश सिंघई, राजीव जैन लकी, अजित जैन मौजूद रहे।