संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत कार्यरत बीमा कंपनी की हकीकत उस समय सामने आ गई, जब जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने किसान दिवस में बीमा कंपनी का टोल फ्री नंबर लगवाया। टूं-टूं कर फोन कट जाने पर डीएम ने नाराजगी जाहिर करते हुए गांव-गांव में कर्मचारी नियुक्त कर शिकायत दर्ज कराने के निर्देश दिए।
बुधवार को विकास भवन सभागार में आयोजित किसान दिवस में फसल नुकसान पर बीमा क्लेम का मुद्दा छाया रहा। उप कृषि निदेशक बसंत कुमार दुबे ने बताया कि खरीफ 2024 फसल का बीमा 1.14 लाख किसानों ने कराया था। बीते दिनों से हो रही बारिश से अब तक 43902 किसानों ने फसल खराब होने का व्यक्तिगत दावा किया है।
समीक्षा के दौरान बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर न लगने की शिकायतों की डीएम ने हकीकत जानी। उन्होंने बैठक में मौजूद बीमा कंपनी के प्रतिनिधि से टोल फ्री नंबर लगवाया। प्रतिनिधि ने नंबर डायल किया, लेकिन फोन नहीं लगा। जिलाधिकारी ने कहा कि बिना बीमा वाले किसानों को भी आपदा राहत कोष से जल्द ही मुआवजा दिलाया जाएगा।
भारतीय किसान यूनियन के मंडल उपाध्यक्ष कीरत बाबा ने कहा कि बीमा कंपनी के प्रतिनिधि किसानों को गुमराह कर रहे हैं। वे फर्जी तरीके से 90 फीसदी फसल खराब होने का झांसा देकर हस्ताक्षर करा रहे हैं। कंपनी का टोल फ्री नंबर लगाने पर उधर से भी अपनी ही आवाज सुनाई पड़ रही है। भारतीय किसान संघ के प्रांत उपाध्यक्ष केहर सिंह ने कहा कि बीमा कंपनी के प्रतिनिधि ठग रहे हैं।
प्रगतिशील किसान जनमोर्चा के अध्यक्ष बाबूलाल दुबे ने कहा कि किसानों को तत्काल 25 फीसदी राशि का भुगतान किया जाए। मोर्चा के संयोजक नवनीत सिंह ने कहा कि फसलें पूरी तरह खराब हो गई हैं। 90 फीसदी नुकसान घोषित किया जाए। सुनील शर्मा ने चकबंदी में लेखपाल पर गड़बड़ी करने के आरोप लगाए। इस दौरान अपर जिलाधिकारी अंकुर श्रीवास्तव, जिला कृषि अधिकारी राजीव कुमार भारतीय, एलडीएम समेत अन्य अधिकारी व किसान मौजूद रहे।
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एक किसान का छलका दर्द
कुछ महीने पहले एक किसान ने गेहूं का बीज अनुदान पर लिया था। बीज की राशि का भुगतान कर दिया था, लेकिन अब तक उसके खाते में अनुदान की राशि नहीं आई। किसान ने बताया कि जब उसने अधिकारी को फोन लगाया तो उसने बात न करने की नसीहत दे डाली। मामले का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने जल्द भुगतान कराने के निर्देश दिए।