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त्याग आत्मा को बनाता है सुंदर

Sun, 27 Sep 2015 01:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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  श्री क्षेत्रपाल मंदिर में पर्यूषण पर्व के दौरान धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि धन की तीन गतियां मानी गई हैं। यदि किसी को दे दिया और परोपकार में लगा दिया तो ठीक है, उसका उपभोग कर लिया तो ठीक अन्यथा नाश तो होना ही है। त्याग आभूषण है। यह सुख, शांति और उन्नति का मार्ग है, जिसको धारण करने में ही व्यक्ति को शांति की अनुभूति होती है। व्यक्ति जब जन्म लेता है तो मां को पीड़ा देता है और संसार में आता है तो तरह-तरह के कष्ट भोगता है। जब मरता है तो शोक देता है। यदि वह जीवन में पुरुषार्थ करे तो मर कर नारायण बनता है और न करे तो नारकी बन जाता है।पर्यूषण पर्व में प्रात:काल भगवान चंद्रप्रभ् पार्श्वनाथ, शांतिनाथ एवं अभिनंदन नाथ का अभिषेक और शांति धारा मनोज जैन, प्रदीप जैन, सुशोभित सराफ, मनोज जैन बबीना, मुकेश सर्राफ, अक्षय अलया, सुरेंद्र जैन, मुकेश नेता, अनूप सराफ, रमेश जैन बानपुर, धर्मेंद्र सिंघई मुनमुन, अशोक जैन और सुनील समैया द्वारा की गई। आर्यिकाश्री को शास्त्र भेंट जैन मिलन महिला अरिहंत ग्रुप की शशि कामरा, उमा किरण जैन, अंजना जयंती अलया, ममता मोहनी और रेखा जैन द्वारा किया गया। पर्यूषण पर्व पर ध्यान प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, जिसमें नरेंद्र जैन और छोटे पहलवान अव्वल रहे, जिन्हें जैन पंचायत के पदाधिकारी अनिल जैन अंचल, डा. अक्षय टडैया, राजेंद्र जैन थनवारा, मोदी पंकज जैन, संजीव जैन आदि ने पुरस्कृत किया। रात्रि में संगीतमय आरती हुई।    
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