व्यापारी किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। पहले किसान से जिंस के दाम तय कर लिए जाते हैं, फिर जब ट्रैक्टर से माल आता है तो व्यापारी नानुकर करने लगते हैं। किसान मजबूर हो जाता है, क्योंकि उसके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं होता है। किसानों के सामने संकट है कि उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए दुकानदार बहुत कम मिल रहे हैं। इस कारण उनकी मजबूरी है कि जिस दुकानदार से सौदा तय होता है, उसी के पास किसान पहुंच जाते हैं। वहां पर किसान से कहा जाता है कि तुम्हारा अनाज में कचरा बहुत ज्यादा है तो कोई कहता है कि तुम्हारे अनाज का दाना ठीक नहीं है। ऐसे में फिर मोलभाव होता है और दाम कम करके माल खरीदा जाता है। इससे किसानों को नुकसान हो रहा है।