संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। अपने आप को इंस्पेक्टर बताकर लोगों से रुपये ऐंठने वाला साइबर ठग पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस ने आरोपी के अकाउंट को फ्रीज कराकर पीड़ित के 60 हजार रुपये भी वापस कराए।
काफी समय से साइबर ठग नए तरीके से लोगों को ठग रहे थे। किसी मुकदमे के वादी को साइबर ठग फोन करते और अपने आप को इंस्पेक्टर बताते हुए आरोपियों को गिरफ्तार करने की बात कहते थे। इसके एवज में साइबर ठग लोगों से खर्चा के नाम पर अपने खातों में धोखाधड़ी से रुपये ट्रांसफर कराते थे। हाल में साइबर थाना में एक मुकदमा दर्ज किया गया था। साइबर ठग ने एक ग्रामीण से मुकदमे के आरोपियों पर कार्रवाई करने के नाम पर रुपये खाते में ट्रांसफर करा लिए थे। साइबर क्राइम थाना पुलिस जांच पड़ताल में जुटी थी। पता चला कि ग्रामीण से इंस्पेक्टर बनकर सुमित यादव निवासी नौरा पोस्ट थोना थाना टेहरका जनपद निवाड़ी, मध्य प्रदेश ने रुपये ट्रांसफर कराए थे।
रविवार को साइबर पुलिस ने सुमित यादव को हवाई पट्टी के पास से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके खाते से 60,000 रुपये फ्रीज कराकर वादी को वापस भी कराए। गिरफ्तार करने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक साइबर क्राइम थाना शावेज खान, उपनिरीक्षक राहुल सिंह, गौतम पूनिया आदि शामिल रहे।
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यूपी कॉप के माध्यम से खोजता था शिकार : सुमित ने बताया कि उनका एक संगठित गिरोह है, जो लोगों को फोन कर थानों में लिखाए गए मुकदमे में कार्रवाई का आश्वासन देकर झांसे में लेते हैं। यूपी कॉप एप के माध्यम से थानों में पंजीकृत एफआईआर का विवरण प्राप्त कर लेता था। इसके बाद मुकदमा चिह्नित कर वादी के फोन नंबर पर काॅल करता था। उन्हें बताता था कि वह एसपी आफिस से इंस्पेक्टर या सीओ आफिस से बोल रहा है। वह विपक्षियों के खिलाफ कोर्ट में वारंट जल्दी जारी कराने की बात कहता था। इसके एवज में रुपया की मांग करता था।
ठगी के लिए 15 दिन की ली थी ट्रेनिंग
सुमित ने बताया कि गिरोह के सदस्यों को ट्रेनिंग दी जाती है कि कैसे साइबर फ्रॉड करना है। उसने साइबर ठगी करने के लिए 15 दिनों का कोर्स किया था। सिखाया जाता है कि वह किस प्रकार से बात करें कि आमलोगों को उन पर शक न हो।