उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने क्रिमिनल मिसलेनियस रिट के संबंध में जारी आदेशों में कहा है कि प्रदेश के सभी जनपदों में महिला थाना स्थापित किए गए हैं, जिनका क्षेत्राधिकार नगरीय सीमा के अलावा संपूर्ण जनपद होगा। भारतीय दंड विधान की धारा 498 ए तथा 3/ 4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट किसी भी थाने में दर्ज कराई जाती है, तो संबंधित थानेदार पीड़िता का आवश्यकतानुसार चिकित्सीय परीक्षण कराकर रिपोर्ट पंजीकृत कर सकता है। इसके बाद उक्त प्रकरण की विवेचना महिला थाना स्थानांतरित कर दी जाएगी। महिला थानाध्यक्ष दहेज उत्पीड़न के सीधे थाने पर दर्ज होने वाले मामलों के अलावा जिले के किसी भी थाने में दर्ज होने वाले दहेज उत्पीड़न के मामलों की विवेचना करेंगे। इसके अलावा इस तरह के प्रकरण आने पर महिला थाना दस दिन के अंदर सिविल कोर्ट में स्थापित मध्यस्थता केंद्र में संदर्भित करेंगे। उच्च न्यायालय की ओर से पारित आदेशों में यह भी कहा गया है कि यदि दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता नहीं बन पाती है, और अभियुक्तों की गिरफ्तारी आवश्यक है, तो धारा 141(बी)(2) के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी। उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव आरएस श्रीवास्तव की ओर से इस संबंध में जारी निर्देशों के क्रम में पुलिस अधीक्षक प्रभाकर चौधरी ने सभी थानाध्यक्षों को निर्देशित किया है कि दहेज उत्पीड़न के मामलों की विवेचनाएं महिला थाना स्थानांतरित की जाएं।