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पैसों की लालच में किया था चाचा का कत्ल

Wed, 03 Feb 2016 11:55 PM IST
ब्यूरो
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ललितपुर। बुधवार को पुलिस अधीक्षक ने मुनीम हत्याकांड का खुलासा कर दिया। भतीजे ने अपने दोस्तों के साथ चाचा के रुपये लूटने के उद्देश्य से हत्या की घटना को अंजाम दिया था।
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पुलिस लाइन सभागार में पत्रकार से बातचीत करते हुए पुलिस अधीक्षक बालेंदु भूषण सिंह ने मुनीम हत्याकांड का खुलासा कर दिया। उन्होंने बताया कि मुनीम की हत्या उसके भतीजे ने अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर की थी। तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

आरोपियों ने पकड़ने गई पुलिस टीम पर फायरिंग भी की गई। उन्होंने कहा कि रविवार को तालबेहट क्षेत्र के असउपुरा गांव के पास शव बरामद हुआ था, जिसका गला रेता हुआ था। शव की शिनाख्त सदर कोतवाली के मुहल्ला रामनगर निवासी हरप्रसाद कुशवाहा के रूप में हुई थी। हरप्रसाद कपड़े की दुकान पर मुनीम का काम करता था, रविवार को वह चंदेरी उधारी की वसूली करने गया था।
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उन्होंने बताया कि मृतक की मोबाइल कॉल डिटेल रिपोर्ट के आधार पर कुछ नंबरों को ट्रेस किया गया। इनमें से एक नंबर से रविवार को हरप्रसाद को कई बार कॉल की गई थी। जांच में यह नंबर उसके भतीजे आशाराम कुशवाहा का निकला। आशाराम को संदिग्ध मानकर उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जाने लगी। बुधवार की दोपहर डेढ़ बजे उसके हवाई पट्टी पर होने की सूचना पर कोतवाली पुलिस व स्वॉट ने छापमारी की।

इस दौरान आरोपियों ने पुलिस पार्टी पर फायर झोंक दिया। घेराबंदी कर पुलिस ने तीन आरोपियों मुहल्ला चौबयाना निवासी आशाराम, रोहित उर्फ आरिफ पुत्र असलम खान, महेंद्र उफ झेंझे कुशवाहा को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास 315 बोर के दो तमंचे, दो कारतूस व दो खोका बरामद हुए हैं। आरोपियों की निशानदेही पर गला रेतने वाला चाकू, खून से सनी शर्ट व मृतक का चश्मा बरामद हो गया है।

इस दौरान अपर पुलिस अधीक्षक सुधा सिंह, सीओ कुंवर बहादुर सिंह, प्रतिसार निरीक्षक शिवराम सिंह, कोतवाली प्रभारी उदयभान सिंह आदि उपस्थित रहे।

हत्या की थी पूरी तैयारी
आशाराम कुशवाहा ने अपने चाचा की हत्या की पूरी तैयारी कर रखी थी। करीब 15 दिन पूर्व उसने अपने दोस्त महेंद्र उर्फ झेंझे को चाचा को लूटने व हत्या करने की योजना बताई थी। आशाराम को जानकारी थी कि चाचा हर 15 दिन में उधारी की वसूली करने जाता है और उसके पास एक से डेढ़ लाख रुपया होता है।

घटना वाले दिन आशाराम ने अपनी लोडिंग टैक्सी से आरिफ और महेंद्र को राजघाट में छोड़ दिया और खुद मोटरसाइकिल से चंदेरी चला गया। चंदेरी में उसने हरप्रसाद से मोबाइल पर बात कर ललितपुर साथ चलने को कहा। भतीजा होने के कारण उसे साथ जाने में कोई दिक्कत नहीं हुई।

राजघाट पहुंचने पर आशाराम ने पेट्रोल खत्म होने की बात कही और महेंद्र को टैक्सी लेकर बुला लिया। टैक्सी में बाइक लादकर चारों ललितपुर आने लगे। अंधेरा होने के इंतजार में उन्होंने राजघाट से दैलवारा आने में दो घंटे लगा दिए। दैलवारा पहुंचने पर आशाराम का इशारा पाकर महेंद्र ने तमंचा मुनीम को अड़ा दिया। दैलवारा से ग्राम राखपंचमपुर पहुंचने पर आशाराम ने ब्रेक वायर से अपने चाचा का गला घोंट दिया।

हरप्रसाद के बेसुध होते ही उसके सारे रुपए निकाल लिए। मुुुुनीम के पास से 24 हजार रुपए निकले, जिन्हें आपस में बांट लिया। वहां टैक्सी पंचर होने के कारण उन्होंने बाइक उतारी और अचेत हरप्रसाद समेत चारों हाइवे पर आ गए। हाईवे से होते हुए वह असउपुरा गांव के पास पहुंचे और शव फेंककर भाग गए।

कहीं जिंदा न हो चाचा
आशाराम किसी भी हालत में चाचा को जिंदा नहीं छोड़ना चाहता था। ग्राम राखपंचमपुर में गला घोंटने के बाद करीब तीस किलोमीटर ले जाने के बाद चाचा को फेंक दिया। फेंककर वापस जाने से पहले आशाराम चाचा की मरने की तस्सली कर लेना चाहता था। इसलिए उसने अपने साथी आरिफ से उसका गला रेतने को कहा। आरिफ ने चाकू से मुनीम का गला रेत दिया।

पुरस्कार के लिए होगी संस्तुति
24 घंटे में अंधे हत्याकांड का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को पुलिस अधीक्षक बालेंदु भूषण सिंह ने पांच हजार रुपये पुरस्कार देने की घोषणा की है। इसके साथ ही आईजी जोन व डीआईजी स्तर से पुरस्कृत कराने के लिए संस्तुति की जाएगी।

खुलासा करने वाली टीम में कोतवाली प्रभारी उदयभान सिंह यादव, स्वाट प्रभारी जितेंद्र सिंह चंदेल, देवी सिंह, विनोद कुमार, एचपी बुधौलिया, श्याम सुंदर यादव, रविंद्र कटियार, संजय सिंह, संजीव शर्मा, देवराज, शफीक, मनोज कुमार, दीपक, रविंद्र, कप्तान सिंह आदि शामिल रहे।

मेंटल के बाद झेंझे
मुनीम हत्याकांड में शामिल महेंद्र कुशवाहा को परिचित लोग झेंझे के नाम पुकारते है। उसका चाचा बब्लू भी अपराधिक प्रवृत्ति का रहा है। उस पर कई हत्या के मामले दर्ज थे। उसे लोग मेंटल के नाम से पुकारते थे। मेंटल की कुछ वर्ष पूर्व हत्या कर दी गई थी।
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