शुक्रवार को पांच वर्ष पुराने दलित एक्ट के मामले में जिला न्यायाधीश सुभाष चंद शर्मा की अदालत ने दो अभियुक्तों को छह-छह माह का कारावास और दो-दो हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर एक-एक माह का अतिरिक्त कारावास भुुगतना होगा।
प्रभारी जिला शासकीय अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह यादव ने बताया कि पांच वर्ष पूर्व थाना कोतवाली अंतर्गत मोहल्ला नदीपुरा निवासी आशीष कुमार पुत्र मुकेेश ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि वह 10 मार्च 2012 को शाम करीब चार बजे नैया मेडिकल स्टोर पर दवाई वितरण का कार्य कर रहा था। इस बीच सिविल लाइन निवासी हबीब खां व डोंड़ाघाट निवासी राजेश जैन मेडिकल स्टोर के बगल में डॉ. आरपी सिंह के आवास में घुसने लगे, मना करने पर हबीब खां ने कहा कि हम लोग पत्रकार हैं और अभद्रता करते हुए गाली-गलौज की। साथ ही जातिसूचक शब्दों से अपमानित करते हुए मारपीट करने लगे। मारपीट के दौरान उसके शरीर में कई चोटें आई। पुलिस ने वादी के तहरीर के आधार पर उक्त दोनों लोगों के खिलाफ घर में घुसकर मारपीट कर गाली गलौज करने, जान से मारने की धमकी देने और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। बृहस्पतिवार को न्यायालय ने अभियोजन पक्ष की ओर से सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ने अभियुुक्त हबीब खां और राजेश जैन को मारपीट व गाली गलौज व एसएस/एसटी एक्ट में दोषी पाते हुए छह-छह माह के कारावास और दो-दो हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर एक-एक माह का अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।