ललितपुर। दो वर्ष पुराने मामले में बेटे को अदालत से राहत मिलने के बाद महरौनी से बहुजन समाज पार्टी के विधायक फेरन लाल अहिरवार ने समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के भाई सांसद रामगोपाल यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि बेटे के केस को रफा-दफा कराने के लिए सांसद रामगोपाल यादव और मंत्री अंबिका चौधरी ने विधान परिषद के चुनाव में वोट देने का दबाव बनाया था, लेकिन जब उन्होंने वोट देने से मना कर दिया तो उन्हें राजनीतिक षड्यंत्र के तहत प्रताड़ित कराया गया। वह सिविल लाइन स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बात कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि बेटे के खिलाफ दर्ज कराए गए झूठे मुकदमे की सीबीसीआईडी जांच कराने के लिए वह एक विधायक के माध्यम से मुख्यमंत्री से मिलने के लिए गए थे, लेकिन सीएम से भेंट नहीं हो पाई। वहां सांसद रामगोपाल से इस संबंध में बात हुई तो उन्होंने सौदेबाजी की। सांसद रामगोपाल की बात न मानने पर उनके खिलाफ पुलिस प्रशासन ने मोर्चा खोल दिया। बेटे की गिरफ्तारी के लिए आए दिन पुलिस घर पर छापा मारने लगी। कुर्की की धमकी दी जाने लगी। बदतमीजी भी की गई।
यही नहीं, लोकसभा चुनाव में उनकी गाड़ी का चालान भी कर दिया गया। ओला वृष्टि से क्षति हुई फसलों का मुआवजा की मांग को लेकर किसानों द्वारा किए जारहे आंदोलन को वह समाप्त कराने गए थे, लेकिन उनके खिलाफ ही फर्जी मुकदमा दर्ज करा दिया गया। उन्होंने कहा कि बेटे को जिला स्तर के नेताओं ने राजनीतिक षड्यंत्र के तहत फर्जी मुकदमे में फंसाया था। इस मुकदमे से उन्हें सामाजिक और राजनीतिक क्षति पहुंची है। वह इस प्रकरण में विपक्षियों पर कानूनी कार्रवाई करेंगे। इस मौके पर बहुजन समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष जानकी प्रसाद अहिरवार आदि उपस्थित रहे।
यह था मामला
ललितपुर। दो वर्ष पूर्व जिले के एक ग्राम में रहने वाली एक शिक्षिका ने विधायक के पुत्र समेत अन्य पर पुत्री को कार में बैठाकर चंदेरा स्थित पेवरब्रिक्स फैक्ट्री पर ले जाकर पानी में दवा मिलाकर बेहोश करने, अश्लील सीडी बनाने, बलात्कार करने, ब्लैकमेल करने, घर पर आकर पुत्री के साथ मारपीट करने जैसे तमाम आरोप लगाए थे। इस पर कोतवाली पुलिस ने शिक्षिका की तहरीर पर विभिन्न धाराओं में विधायक पुत्र सुरेंद्र कुमार अहिरवार और उसके साथी रीतेश रजक आदि पर मुकदमा पंजीकृत किया था। आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया था। एक जनवरी को उक्त प्रकरण में अपर सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार शर्मा ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों एवं तर्कों को नकारते हुए विधायक पुत्र सुरेंद्र कुमार अहिरवार एवं रीतेश रजक को बरी कर दिया। यही नहीं, शिक्षिका को झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने का दोषी मानते हुए एक हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है।