ललितपुर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने शनिवार को हत्या करने का दोष सिद्ध होने पर आरोपी को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
घटना की पृष्ठभूमि में बताया जाता है कि ग्राम बूटी में चौदह अप्रैल 2011 की दोपहर एक बजे मथुरा ने अपने चचेरे भाई की धारदार हथियार से हत्या कर दी थी। मथुरा प्रजापति व धनीराम प्रजापति चचेरे भाई थे। दोनों संयुक्त रूप से खेती-बाड़ी करके परिवार चलाते आ रहे थे। गांव से करीब 500 मीटर दूर बने खलिहान में 14 अप्रैल 2011 को दोपहर में चौबीस वर्षीय धनीराम व मथुरा सरसों उड़ा रहे थे, इसको देखते हुए धनीराम खेत पर स्थित टपरे में जाकर सो गया और मथुरा सुरया(झाड़ी काटने वाला हथियार) लेकर झोपड़ी में जा पहुंचा।
उसने अचानक धनीराम पर सोते समय हमला कर दिया। धनीराम जागा और उसने जान बचाने के लिए भागने का प्रयास किया, लेकिन खेत की ओर भागते समय धनीराम का पीछा करके मथुरा ने सुरया से गर्दन पर हमला कर दिया, जिससे उसकी गर्दन धड़ से अलग हो गई। घटना के समय रमेश प्रजापति मौजूद था। बाद में मृतक धनीराम के भाई बाबूलाल ने पुलिस को सूचना दी और पुलिस ने हथियार सहित मथुरा को गिरफ्तार कर लिया।
घटना के बाद से अब तक वह जिला कारागार में निरुद्ध चल रहा था। बृहस्पतिवार को अपर एवं सत्र न्यायाधीश लोकेश राय ने बाबूलाल व रमेश सहित आठ गवाहों के बयान सुने और फैसला सुरक्षित रख लिया। शनिवार को उन्होंने मथुरा को धारा 302 के तहत हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई और 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा नहीं करने पर तीन माह अतिरिक्त सजा काटनी होगी। मामले की पैरवी सहायक शासकीय अधिवक्ता तिलक सिंह यादव ने की।