महिलाओं के साथ घटित होने वाले गंभीर अपराधों को दृष्टिगत रखते हुए वर्ष- 2013 में उच्च न्यायालय ने भारतीय दंड विधान की धाराओं में अनेक परिवर्तन किए थे, साथ ही पीड़ित महिलाओं के अधिकार, निजता और आत्म सम्मान को दृष्टिगत रखते हुए प्रावधान भी किए थे, जिसके तहत पीड़ित महिलाओं को रात में थाने पर न बैठाए जाने, महिला अधिकारी के द्वारा ही उसके बयान अंकित कराए जाने, रात में ठहरने के लिए अस्पताल में आसरा के तहत व्यवस्थाएं कराए जाने की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही छेड़छाड़, बलात्कार, घरेलू हिंसा आदि अपराधों से पीड़ित महिलाओं की रिपोर्ट महिला सिपाही द्वारा दर्ज कराए जाने का प्रावधान किया गया है, जिसके अंतर्गत पुलिस अधीक्षक ने सभी कोतवाली और थानों में तत्काल प्रभाव से महिला आरक्षियों को कांस्टेबल मुहर्रिर पद पर तैनात कर दिया है।