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फास्ट ट्रैक कोर्ट: 08 माह में 34 सजा

Mon, 08 Feb 2016 12:29 AM IST
ब्यूरो
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ललितपुर।  जिले की फास्ट ट्रैक अदालत में न्याय का पहिया काफी तेजी से घूम रहा है। गंभीर आपराधिक मामलों, यौन शोषण, बलात्कार, हत्या, दहेज हत्या और नाबालिगों के साथ गंभीर प्रकृति के अपराधों में सजा दिलाने में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सात महीने में लगभग साठ मामलों में निर्णय देते हुए 34 मामलों में सजा सुनाई है।
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इसमें 23 गंभीर आपराधिक मामलों  में सात वर्ष, आजीवन करावास और मृत्युदंड तक की सजा सुनाई जा चुकी है।
जिले में फास्ट ट्रैक कोर्ट 16 अप्रैल 2015 को शुरू हुई। गंभीर आपराधिक मामलों में शीघ्र निर्णय कर पीड़ितों को न्याय दिलाने में फास्ट ट्रैक कोर्ट न्यायाधीश हरकेश  कुमार की अदालत द्वारा 30 मई से अब तक कुल 34 मामलों में सजा का प्रावधान किया गया है।

इसमें से 23 मामलों में तो अधिक से  अधिक सजा सुनाई गई है। इनमें बलात्कार व यौन शोषण संबंधी आपराधिक  प्रकृति के नौ मामलों में न्यायालय द्वारा पांच वर्ष से लेकर आजीवन  कारावास तक की सजा सुनाई है, जिसमें अर्थदंड भी शामिल है। इसके अलावा हत्या, दहेज हत्या व जानलेवा हमला के गंभीरतम अपराधों के दस मामलों में दस वर्ष और  आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है।
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इसमें हत्या के एक गंभीर एवं जघन्य अपराध में अदालत ने 13 जनवरी को थाना बानपुर  अंतर्गत ग्राम अजनौरा में सास व साले की हत्या के अपराधी जुगल को मृत्युदंड  की सजा सुनाई गई थी। इसी प्रकार छह नवंबर को तालबेहट में एक बंगाली डाक्टर  की पत्नी की हत्या डाक्टर के ही भाई ने कर चाकू से गोदकर कर दी थी, जिसमें  डाक्टर के दो बच्चों को जान से मारने की कोशिश की गई थी,

हालांकि इस हमले  में बच्चे बच गए थे। इस मामले में हत्यारोपी को आजीवन कारावास और एक लाख  रुपए अर्थदंड की सजा से दंडित किया गया था। यह मामले उस वक्त पूरे जनपद में  चर्चा का विषय बने रहे थे।

वहीं, अन्य आपराधिक प्रकृति के वादों में तीन  वर्ष से सात वर्ष तक की सजा और अलग-अलग धनराशि के अर्थदंड की सजा से  अपराधियों को दंडित किया गया है। इसके अलावा साठ से अधिक आपराधिक प्रकृति के मामलों का त्वरित व  शीघ्र निस्तारित करते हुए लगभग 40 से अधिक मामलों में संदेह का लाभ देते हुए आरोपियों को बरी किया है। कुल मिलाकर मात्र सात महीनों में साठ से अधिक  मामलों में निर्णय सुनाते हुए निस्तारित किया गया है।

न्यायालय द्वारा  पीड़ितों को न्याय दिलाने को प्राथमिकता  मानते हुए निर्णय साक्ष्यों, गवाहों व अभियोजन पक्ष की दलीलों को तर्क संगत  मानते हुए सुनाए गए हैं। इन  सभी मामलों की पैरवी शासकीय अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह यादव ने की है।

पुरस्कृत हो चुके शासकीय अधिवक्ता
जनपद न्यायालय स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा 13 अगस्त 2015 को थाना  बानपुर अंतर्गत ग्राम अजनौरा में सास व साले की जघन्य हत्या के अपराधी जुगल को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी। इसमें पैरवी करने वाले शासकीय  अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह यादव के अलावा विवेचक और मुख्य गवाह को 27 जनवरी को लखनऊ में पुरस्कृत किया जा चुका है।
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