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विद्युत उत्पादन का हब बनेगा जनपद

Sat, 20 Jun 2015 12:49 AM IST
ललितपुर/ ब्यूरो
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ललितपुर। जनपद विद्युत उत्पादन का हब बनने जा रहा है। सौर ऊर्जा प्लांट के साथ चिगलौआ पॉवर प्लांट के चालू होते ही 220, 400 व 765 केवीए के बड़े उप बिजलीघर बनाए जाएंगे। इनसे मैनपुरी, आगरा सहित अन्य जनपदों रोशन किए जाएंगे। जनपद को कितने घंटे बिजली मिलेगी, इसका फैसला प्रदेश सरकार करेगी।
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वर्तमान में 1,32,000 केवीए की एक लाइन से जनपद जुड़ा हुआ है। इससे 66 केवीए के 5 और 33 केवीए के 9 उप बिजलीघरों को बिजली पहुंचती है। इनमें रखे 10, 8 व 5 एमवीए के बड़े ट्रांसफार्मर में बिजली परिवर्तित होने के बाद 11 केवीए हाइटेंशन लाइनें तक पहुंचती है। इन लाइनों पर 10, 25, 63, 100, 250, 400 आदि ट्रांसफार्मर बिजली को एलटी लाइनों में बदलते हैं। तब जाकर उपभोक्ताओं के घर 220 वोल्ट में बिजली पहुंचती है। यह विद्युत आपूर्ति का स्टैंडर्ड मानक है। हालांकि, बिजली लो वोल्टेज होने पर 180 और हाईंवोल्टेज में 250 तक पहुंच जाती है। अब जनपद विद्युत आपूर्ति का हब बनने जा रहा है। इसके अन्तर्गत 10 मेगावाट के तीन पॉवर प्लांट चालू हो गए हैं।

 वहीं चिगलौआ पॉवर प्लांट की 660 मेगावाट की एक इकाई शुरू हो गई है। हालांकि, इसकी बिजली वर्तमान में दिनारा जा रही है। कल्यानपुरा में 2,20,000 का बड़ा पॉवर प्लांट लगभग बनकर तैयार है। इसके बाद 220, 400, 765 की हाइटेंशन लाइनें भी बनाई जाएंगी। इन लाइनों से दिनारा, मैनपुरी, आगरा को जोड़ा जाएगा, जिससे अन्य जनपद रोशन होंगे। पॉवर प्लांट की तीनों इकाई चालू होने की स्थिति में 1980 कुल मेगावाट उत्पादन होगा। इसके साथ 30 मेगावाट सोलर प्लांटों से किया जाएगा। कुल मिलाकर 2010 मेगावाट से पूरा बुंदेलखंड के साथ 15 जनपदों को बिजली पहुंचनी शुरू हो जाएगी।
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जनपद को 96.8 मेगावाट चाहिए बिजली
जनपद के 13 सार्वजनिक और एक प्राइवेट उप बिजलीघरों में 5 एमवीए के 15, 10 एमवीए के 2, 8 एमवीए के 3, 2 एमवीए के कुल 21 बड़े ट्रांसफार्मर रखे हुए हैं। कुल 121 एमवीए के ट्रांसफार्मरों से 11,000 केवीए के छोटे फीडर निकलते हैं। सात सौ से अधिक गांव वाले जनपद को करीब 96.8 मेगावाट बिजली की जरूरत होती है। जबकि, जनपद में 19 गुना अधिक बिजली उत्पादन शुरू हो जाएगा।

माताटीला भी है सहायक
माताटीला बांध से दो या तीन माह ही बिजली मिलती है। पानी कम होने की स्थिति में बिजली का उत्पादन बंद हो जाता है। बांध से करीब 30 मेगावाट बिजली उत्पादन की जाती है, लेकिन यह अधिकांश बारिश के दौरान ही हो पाता है। हालांकि, राजघाट बांध से भी बिजली बनाई जाती है, लेकिन इसका लाभ मप्र को मिलता है। इस प्रकार माताटीला, सोलर प्लांटा, चिगलौआ प्लांट की बिजली को जोड़ दिया जाए तो 2040 मेगावाट आने वाले दिनों में बिजली बनेगी। बारिश के दिनों को छोड़कर 2010 ही बिजली बन सकेगी।
 

132 केवीए से जुड़ा महरौनी
पारीछा, हंसारी होते हुए रोड़ा तक आने वाली 1,32,000 केवीए लाइन के अलावा हंसारी से महरौनी को भी 132 केवीए हाइटेंशन लाइन से जोड़ दिया गया है। विगत दिनों इस लाइन को ऊर्जीकृत भी किया जा चुका है। हालांकि, वर्तमान में रोड़ा से ही बिजली महरौनी सहित ग्रामीण इलाकों को दी जा रही है। लेकिन, विद्युत अधिकारियों की मानें तो आने वाले दिनों से सीधे हंसारी से महरौनी को चालू कर दिया जाएगा।


24 घंटे मिलेगी जनपद को बिजली?
करीब 15 जनपदों को जितनी बिजली चाहिए, उतना उत्पादन सभी इकाईयां चालू होने के बाद जनपद में शुरू हो जाएगा। लेकिन, जनपद के लोगों में एक ही सवाल है कि जनपद को 24 घंटे बिजली मिलेगी। इसका फैसला शक्ति भवन लखनऊ लेता है, जिसकी सत्ता प्रदेश में होगी उसका मुखिया ही जनपद में कितने घंटे बिजली मिलेगी। इसका निर्णय करता है।


लाइनों का बिछेगा जाल
जनपद में एलटी, 11000, 33000, 66000 केवीए की लाइनें पहले से निकली हुई हैं। इसके साथ 1,32,000, 2,20,000, 4 लाख, 7.65 लाख केवीए वाली लाइनें भी बनने जा रही हैं। इससे हाइटेंशन लाइनें का जाल बिछ जाएगा। कल्यानपुरा 220 केवीए चालू होने के बाद जनपद को पॉवर प्लांट से अधिकांश बिजली मिलेगी। पारीछा से निर्भरता खत्म हो जाएगी।
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