ललितपुर। दहेज की खातिर मिट्टी का तेल डालकर बहू की जलाकर हत्या करने में दोषी सास, ससुर को अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम) मनोज कुमार शुक्ला की अदालत ने 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और आठ-आठ हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता लखनलाल यादव ने बताया कि दो वर्ष पूर्व थाना जाखलौन अंतर्गत ग्राम दावनी निवासी कड़ोरे पुत्र कूरे कुशवाहा ने थाना बानपुर में बताया था कि उसने अपनी पुत्री शीला की शादी करीब दो वर्ष पहले थाना बानपुर अंतर्गत ग्राम पड़राई निवासी किशन पुत्र मूलचंद्र कुशवाहा के साथ की थी और अपनी हैसियत के अनुसार उपहार दिया था। दहेज के लिए उसके ससुरालीजन उसकी पुत्री का उत्पीड़न करके और दहेज की मांग कर रहे थे। 22 जुलाई 2015 को कचनौंदा गांव के एक व्यक्ति ने फोन से बताया कि उसकी पुत्री दहेेज के कारण मिट्टी का तेज डालकर आग लगाकर जला दिया है। जिस पर वह तत्काल ग्राम पड़राई पहुंचा, तो देखा कि उसकी लड़की की बुरी तरह जलने से मौके पर ही मृत्यु हो गई थी। पिता की तहरीर पर बानपुर पुलिस ने उसकी पुत्री के पति किशन, ससुर मूलचंद और सास खुशीबाई के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। इस मामले में आरोपी किशन का मामला नाबालिग होने के चलते जुबेनाइल कोर्ट में विचाराधीन चल रहा है। बुधवार को अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में दी गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायाधीश ने दहेज की मांग करने, दहेज के लिए उत्पीड़न करने और दहेज की खातिर बहू की हत्या करने में दोषी अभियुक्त मूलचंद और खुशीबाई को दस-दस वर्ष के कठोर कारावास और आठ-आठ हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
परिवार परामर्श केंद्र में समझौता से भेजा था ससुराल
उक्त मामले में घटना से दो माह पूर्व पीड़िता बहू शीला द्वारा ससुरालियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए महिला थाना में 22 मई 2015 को एक प्रार्थना पत्र दिया था। जिस पर महिला थाना पुलिस ने 27 जून 2015 को पीड़िता शीला को महिला थाना में हर शनिवार को सुलह-समझौता के आधार आयोजित होने वाले परिवार परामर्श केंद्र में उसके ससुरालियों से समझौता कराकर पति के साथ ससुराल भेज दिया था और इसके एक माह के भीतर ही 22 जुलाई 2015 को शीला की मिट्टी का तेल डालकर आग से जलाकर हत्या कर दी गई।