जिला अस्पताल से रिफर करने के बाद झांसी ले जाते समय 108 एंबुलेंस में सिलेंडर की ऑक्सीजन खत्म होने से एक वृद्धा की मौत हो गई। परिजनों ने जिला चिकित्सालय में जमकर हंगामा किया और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए एंबुलेंस ड्राइवर पर लापरवाही के साथ ही आक्सीजन के लिए पांच सौ रुपये मांगने का आरोप लगाया।
जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही आए दिन सामने आ रही है। सोमवार को भी एक ऐसा ही मामला सामने आया, जब 108 एंबुलेंस की गाड़ी में ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म होने से एक वृद्ध मरीज की मौत हो गई। शहर के मुहल्ला झांसीपुरा निवासी 55 वर्षीय महिला कृष्णा
वाल्मीकि को सोमवार की सुबह छह बजे सीने में दर्द की शिकायत हुई, इस पर परिजनों द्वारा उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां इमर्जेंसी में मौजूूद चिकित्सकों ने प्राथमिक इलाज किया और उसकी हालत गंभीर होने पर झांसी मेडिकल कॉलेज रिफर कर दिया।
जिला अस्पताल परिसर में उपलब्ध 108 एंबुलेंस से मरीज को लेकर परिजन झांसी के लिए रवाना हो गए, लेकिन बाईपास रोड पर कुछ ही दूर आगे पहुंचे कि एंबुलेंस की ऑक्सीजन खत्म हो गई, इस पर ड्राइवर ऑक्सीजन का सिलेंडर लेने एंबुलेंस का वापस जिला अस्पताल वापस लाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और अस्पताल में पहुंचते ही मरीज की मौत हो गई। यह देख परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और एंबुलेंस स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में जोरदार हंगामा किया।
अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मृतक के परिजनों द्वारा आरोप लगाया गया कि मरीज को एंबुलेंस में शिफ्ट करने के दौरान जिम्मेदार स्टाफ द्वारा उसमें व्यवस्थाओं की जांच नहीं की गई और बिना ऑक्सीजन वाला खाली सिलेंडर लगी एंबुलेंस में गंभीर मरीज को रवाना कर दिया गया। इस लापरवाही से मरीज की ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण मौत हो गई। नाराज परिजनों ने एंबुलेंस स्टाफ पर ऑक्सीजन सिलेंडर लगाने के लिए पांच सौ रुपए मांगने का भी आरोप लगाया। हालांकि हंगामा करने के कुछ देर बाद परिजन मृतका की बॉडी लेकर चले गए।
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नोडल अधिकारी चेक करता है
एंबुलेंस में मरीज ले जाने से पहले नोडल अधिकारी द्वारा चेक किया जाता है, तब ही एंबुलेंस बाहर ले जायी जाती है। मरीज की मौत सीरियस होने की वजह से हुई होगी, ऑक्सीजन की कमी से मौत होना प्रतीत नहीं होता है।
डा.प्रताप सिंह, सीएमओ।