चेतावनी देकर कर ली इतिश्री
ललितपुर।
जिला अस्पताल परिसर स्थित मोर्चरी में आठ दिन पड़े रहे शव के मामले में सीएमओ ने अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। इसमें उन्होंने एक चिकित्सक और एक फार्मासिस्ट को चेतावनी देने की संस्तुति की है, जिससे जांच पर सवाल खड़े हो गए हैं।
बता दें कि चार दिसंबर को शहर कोतवाली क्षेत्र के रेलवे स्टेशन के पास देवगढ़ रोड जाने वाली सड़क के किनारे स्थित नाली में 35 वर्षीय युवक अचेत अवस्था में मिला था। स्थानीय लोगों ने एंबुलेंस को सूचना देकर उसे जिला अस्पताल पहुंचाया था। जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर शव को मोर्चरी में रखवा दिया था। मानवता को शर्मसार करने वाली बात यह थी कि, आठ दिन बीतने के बाद भी शव की सूचना पुलिस को नहीं दी गई और न ही पोस्टमार्टम की कोई प्रक्रिया शुरू की गई थी। अज्ञात के शव को मृत अवस्था में लाए जाने की एंट्री एंबुलेंस के रजिस्टर में की गई थी, जबकि अस्पताल प्रशासन के दस्तावेजों में इस शव का कोई उल्लेख नहीं किया गया। इस कारण पुलिस ने भी इस ओर कोई प्रयास नहीं किए थे। आठ दिन बीत जाने के कारण शव पूरी तरह सड़ चुका था । इसके बाद शव को जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया। लेकिन लापरवाही की तब इंतहा हो गई जब आठ दिन तक अज्ञात शव का पोस्टमार्टम कराने की सुध भी किसी ने नहीं ली। यही नहीं, अस्पताल प्रशासन की ओर से शव का पोस्टमार्टम करवाने के लिए पुलिस के पास कोई सूचना भी नहीं दी गई। इससे शव पूरी तरह सड़ चुका था। डीएम मानवेंद्र सिंह मामला उछलने पर इसकी जांच करने के आदेश एसडीएम सदर महेश प्रसाद दीक्षित को दिए। वहीं, सीएमओ डा. प्रताप सिंह ने विभागीय जांच प्रारंभ की। जिसमें उन्होंने एक चिकित्सक व एक फार्मासिस्ट की गलती मानी। जिसका जिक्र उन्होंने अपनी आख्या में किया है।
यह है नियम
यदि किसी अज्ञात व्यक्ति को अस्पताल लाया जाता है और उसकी मौत हो जाती है। इसके बाद जिला अस्पताल प्रशासन इसका मेमो भेजकर पुलिस को सूचना देता है। अस्पताल की सूचना पर पहुंचकर पुलिस शव का पंचनामा भरती है और शव की शिनाख्त करने का प्रयास करती है। शिनाख्त न होने की दशा में अज्ञात में पंचनामा भर दिया जाता है। इसके अलावा यह भी नियम है कि अज्ञात शव का 48 घंटों के बाद दाह संस्कार की प्रक्रिया शुरू किया जाना अनिवार्य है।
ड्यूटी स्टाफ की रही लापरवाही
पुलिस को सूचना देने में ड्यूटी स्टाफ की लापरवाही सामने आई है। पुलिस का कहना है कि उन्हें सूचना नहीं भेजी गई, जिससे वह पंचनामा नहीं भर पाए। अब इमरजेंसी कक्ष में एक रजिस्टर रखवा दिया गया है। इसमें चिकित्सकीय स्टाफ सहित पुलिस को इंट्री करनी पड़ी थी।
- डॉ. प्रताप सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी