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प्रधान के जाली हस्ताक्ष्रर कर हड़पी पंचायत की निधि

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प्रधान के जाली हस्ताक्षर कर हड़पी पंचायत निधि
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ललितपुर।
जिले में पूर्व की सरकार के दौरान हुए घपले अब उजागर होने लगे हैं। ऐसा ही एक प्रकरण ग्राम पंचायत कैलगुवां का खुला है। यहां प्रधान के जाली हस्ताक्षर बनाकर ग्राम पंचायत की निधि हड़पने का मामला प्रकाश में आया है। इसमें एक सपा का नेता लपेटे में आ रहा है।
जिला समाज कल्याण अधिकारी की पहल पर डीएम ने जांच बैठायी थी। घटना के अनुसार जनपद में वर्ष 2010 में ग्राम पंचायत कैलगुवां में प्रधान पद पर पुष्पा पत्नी पलू वंशकार निर्वाचित हुई थी। शुरुआती कार्यकाल ठीकठाक चलता रहा, लेकिन जैसे ही प्रदेश में सपा की सरकार बनी, वैसे ही ग्राम प्रधान पर दबाव पड़ने लगा। कुछ लोग दबंगई के बल पर उसका कामकाज संभालने लगे। यही नहीं, सदस्यों को भी अपने साथ ले लिया। एक सपा नेता ने ग्राम पंचायत संबंधित मीटिंग भी अपने घर पर ही संचालित करनी शुरू कर दी, जिसकी प्रधान ने तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस तरह प्रधानी मनमाने तरीके से चलने लगी। जब प्रदेश में सत्ता योगी आदित्यनाथ के हाथों में आई तो ग्रामीणों को न्याय मिलने की उम्मीद जाग गई। उन्होंने पूर्व में हुई गड़बड़ियों की शिकायत जिला प्रशासन से की। इस पर डीएम मानवेंद्र सिंह ने इसकी जांच जिला समाज कल्याण अधिकारी रिंकू सिंह राही सौंप दी। उन्होंने बिंदुवार जांच प्रारंभ की तो चेक पर फर्जी हस्ताक्षर का मामला सामने आया। उन्होंने प्राप्त चेकों पर किए गए हस्ताक्षर की जांच प्रयोगशाला में कराई। इस दौरान तीनों चेकों पर प्रधान के बताये गये हस्ताक्षर गलत पाये गये। इस पर जांच अधिकारी ने प्रधान के पूरे कार्यकाल में हुए लेनदेन संबंधी दस्तावेज तलब किए हैं। जिसमें पंजाब नेशनल बैंक बानुपर में ग्राम पंचायत की ग्राम निधि का खाता, सर्व यूपी ग्रामीण बैंक कैलगुवां में मनरेगा मटेरियल का खाता व मनरेगा लेवर खाता की पत्रावली जांच अधिकारी द्वारा तलब की गई है। बताते हैं कि वर्तमान जांच में 75 हजार के चेकों पर फर्जी हस्ताक्षर होने का मामला बन रहा है। जिससे गबन की धनराशि लाखों में पहुंचकर लाखों में पहुंचना तय माना जा रहा है।
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डीसी मनरेगा की जांच भी सवालों के घेरे में
ग्राम पंचायत में तैनात रोजगार सेवक सुरेंद्र कुमार साहू को फर्जी तरीके से बैठक दर्शाकर हटा दिया था। जिस पर उसने शिकायत डीएम से की। डीएम ने उक्त जांच डीसी मनरेगा व अवर अभियंता डीआरडीए को सौंपी। लेकिन उन्होंने रोजगार सेवक के आरोपों को गलत ठहरा दिया। इसके बाद भी उसने हार नहीं मानी। फिर इसकी जांच जिला समाज कल्याण अधिकारी ने की तो रोजगार सेवक द्वारा लगाये गये आरोपों सही पाए गए। यही से पंचायत की गड़बड़ी की परते खुलनी शुरू हुई। जब ग्राम प्रधान से इस संबंध में पूछताछ की गई तो उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेता पर उनके भी हस्ताक्षर कर ग्राम पंचायत के खातों से धन निकालने की शिकायत की। यही नहीं, उन्होंने 17 बिंदुओं का शपथ पत्र भी सौंपा।

प्रयोगशाला में तीन चेकों की हो चुकी जांच
प्रयोगशाला में कराई जांच में उपलब्ध तीन चेक पर प्रधान के हस्ताक्षर फर्जी पाए गए हैं। बैंकों से इन खातों के निकासी संबंधी पूर्ण अभिलेख तलब किए गये हैं। प्राथमिकी जांच में जिन तीन चेकों को भुगतान हुआ है, उनसे 75 हजार की धन राशि निकाली गई थी।
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सचिव की भूमिका संदिग्ध, आ सकते कार्रवाई के लपेटे में
ग्राम प्रधान के फर्जी हस्ताक्षर कर बैंकों से धनराशि निकालने के मामले में तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। इसके उन पर कार्रवाई की गाज कभी भी गिर सकती है। ग्राम पंचायत के पूरे कार्यकाल में दो पंचायत सचिव तैनात रहे हैं।

बड़ा गबन का बन रहा मामला
चेक पर जाली हस्ताक्षर करने की जांच जारी है। जांच पूर्ण होने के पश्चात ही कुछ कहा जा सकता है। लेकिन यह बात सही है कि बड़ा गबन का मामला बन रहा है।
रिंकू सिंह राही, जिला समाज कल्याण अधिकारी, ललितपुर।
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