थाना नाराहट अंतर्गत ग्राम गुरयाना में 37 वर्ष पूर्व हुए लूूटकांड के अपराधी बाबूलाल को अपर सत्र न्यायाधीश (डकैती) हरीश कुमार यादव की अदालत ने पांच वर्ष का सश्रम कारावास और तीन हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। उक्त मामले के पांच अन्य अपराधियों को न्यायालय द्वारा पूर्व में दंडित किया जा चुका है।
अपर शासकीय अधिवक्ता खुशीलाल लोधी ने बताया कि थाना नाराहट अंतर्गत ग्राम गुरयाना में 37 वर्ष पूर्व 26/27 जुलाई 1980 की रात में वादी जस्सू पुत्र वादरे व उसके परिजन अपने घर में सो रहे थे। आधी रात करीब आठ बदमाश उसके जस्सू के घर की दीवार के पीछे खपरैल पर चढ़कर उसके घर में पहुंचकर दरवाजा को खटखटाते हुए धक्का दिया, जिससे वादी जाग गए। जब उसने खिड़की से झांककर देखा तो सात-आठ बदमाश दिखाई दिए, जिसमें एक के पास बंदूक, दो के पास देेेशी पिस्तौल, एक के पास फरसा व अन्य बदमाशों के पास लाठी थी। बदमाश भूतल से टॉर्च जलाते हुए सीढ़ियों के रास्ते उसके बरामदे में जा पहुंचे और उसे व उसके परिजनों को डरा धमकाकर और मारपीटकर लूटपाट करने लगे। इसी बीच मौके पाकर वचह जस्सू अपने कमरे से निकलकर खपरैल के नीचे कूदकर गांव में भागकर शोर करने लगा। जिसपर गांव के कुछ लोगों ने लाठी-डंडा लेकर बदमाशों को ललकारा। बदमाश उसके घर में लूटपाट करते रहे। इसके बाद उक्त बदमाशों ने जस्सू के चाचा रतनलाल के घर में भी लूटपाट की। साथ ही बदमाशों ने उसके पड़ोसी चतरे साहू के घर में घुसकर लूटपाट की। यहां उन्होंने इस दौरान तीन फायर भी किए। गांव वालों के एकत्रित होने के कारण बदमाश डराते हुए उत्तर की ओर भाग गए। बदमाशों में से एक गांव का ही सरमन लुहार व एक ग्राम देवरी निवासी बाबूलाल पुत्र भरोसे था। बदमाश वादी जस्सू के घर से एक गुंज आठ तोला, दो गोल सोन की मोटे तार की वजन दो तोला, एक जोड़ी पैजना चांदी की वजन लगभग एक किलोग्राम, सौ-सौ रुपए के नोट पांच हजार रुपये, एक नया अलमान लाल रंग, एक रोमन घड़ी 17 ज्वैल्स व रतन के घर से दो जोड़ी पैजना चांदी की वजन पौने दो किलोग्राम, एक सोने का तिदाना डेढ़ तोला, एक सोने की एक तोला की एक अनारदाना, दो सोने की मोहरें आठ आना लूटी गई थी। वहीं चतरे के घर से बदमाशों ने एक जोड़ी ढोढर एक किलोग्राम, एक चांदी का पैजना डेढ़ पाव व दो सोने की बारी छह आना भी उसी दिन लूटी गई थी। इस दौरान चतरे, रानी बहू, शिवरानी को मारपीट में चोटें आई, जिनका चिकित्सीय परीक्षण कराया गया। वहीं साथियों ने नत्थू, आशाराम, खिलावन, जनकू, राजाराम, सरमन की पहचान कर की और पुलिस विवेचना उपरांत आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किए। लेकिन बाबूलाल को गिरफ्तार नहीं किया जा सका और वह पूरे 33 साल फरार बना रहा। जिसके विरुद्ध अन्वेषण किया और उसके विरुद्घ आरोप पत्र दिया। इसके बाद पकड़े अभियुक्तों के खिलाफ न्यायालय द्वारा दिसंबर 1982 को अपर सत्र न्यायालय डकैती द्वारा सजा सुनाई गई थी। इसके बाद अभियुक्त बाबूलाल को पुलिस ने सात नबंवर वर्ष 1913 को पकड़कर न्यायालय में पेश किया। अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत किए बयानों, साक्ष्यों व दलीलों के आधार पर न्यायालय ने शुक्रवार को निर्णय सुनाते हुए अभियुक्त बाबूलाल को पांच वर्ष के सश्रम कारावास और तीन हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर तीन माह अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।