बालू खनन के लिए मुफीद स्थल बना वन क्षेत्र
बड़े पैमाने पर तालबेहट में चल रहा अवैध खनन
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। तहसील तालबेहट के अंतर्गत विभिन्न वन वीटों में धड़ल्ले से बालू का खनन हो रहा है। इससे पौधरोपण के नष्ट होने का खतरा उत्पन्न हो गया है। विभिन्न जगहों पर प्लांटेशन के अंदर बालू का अवैध भंडारण किया जा रहा है।
तालबेहट क्षेत्र में बालू खनन की अपार संभावनाएं हैं। इससे खनन माफियाओं की सक्रियता वन क्षेत्रों के आसपास बनी रहती है। इनमें वन रेंज पवा, सुनौरी, पिपरई, नत्थीखेडा, विरधा वनगुवा आदि वीट शामिल हैं। कड़ेसरा वन भूमि से निकले नदी, नाला में बालू का खनन हो रहा है तो जामनी नदी किनारे स्थापित वन भूमि में कराए गए पौधरोपण के अन्दर बालू का अवैध भंडारण हो रहा है। सूत्र बताते हैं कि वन ब्लाक पवा, सरखड़ी, शाहपुर, सुनौरी बिरधा, नत्थीखेडा़ एवं दस नंबर वन क्षेत्र के अन्दर वाह नाला नाम से प्रचलित एक नाला है, इसमे कई सहायक नाला मिलते हैं जहां बड़े पैमाने में बालू ईकट्ठी होती है। यहां लगभग 300 हेक्टेयर क्षेत्र वन भूमि है, जहां पर बालू का अवैध खनन रात दिन होता है। कई कारोबारियों ने सरखड़ी, सुनोरी, खदरी, पिपरई, बिरधा, नत्थीखेड़ा गांव में निजी भूमि पर या गांव सभा की भूमि पर बालू के डम्प बना लिए हैं। जहां से डम्फर में बालू लाद कर उसकी निकासी होती है। वन क्षेत्र से बाहर आने के लिए पूराकला मार्ग एवं बार लडबारी मार्ग व फोरलेन मार्ग को वाहन चालक चुनते हैं। जब वन क्षेत्र से वाहन निकल आते हैं तो चालक एमएम 11 प्रपत्र खनन पट्टा धारकों से पा लेते हैं। जिससे बालू की निकासी आसान हो जाती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि कई बालू खनन पटृटा धारकों के पास बालू नहीं है वह केवल निकासी प्रपत्र बालू माफियां को बेचकर पैसा बना रहे हैं। यह खेल बडे़ पैमाने पर चल रहा है। इसमे वन कर्मचारियों की संलिप्तता से इंकार नहीं किया जा सकता है। सूत्रों की माने तो अवैध बालू का खनन वन भूमि से रोजाना 2000 घन मीटर होता है, जिससे शासकीय धन की क्षति हो रही है।
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ललितपुर वन क्षेत्र में हो रहा इमारती खनन
वन क्षेत्र पर अधिकारी, कर्मचारियों की पकड़ ढीली पड़ती जा रही है। जिससे खनन का कारोबार तेजी से चल निकला है। रमपुरा क्षेत्र में इमारती पत्थर का खनन हो रहा है। इससे वन संपदा को नुकसान पहुंच रहा है।
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जंगल में पकड़े जाने पर हो रही कार्रवाई
जंगल में बालू खनन पकड़े जाने पर कार्रवाई की जा रही है। वन क्षेत्र पर लगातार नजर रखी जा रही है।
आरएस यादव, प्रभारी डीएफओ