फर्नीचर आपूर्ति नहीं करने पर फर्म केे जारी किया नोटिस
एक माह की थी समयसीमा, बीत गए चार माह, शुरू भी नहीं हो सकी आपूर्ति
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में फर्नीचर की जो आपूर्ति एक माह में की जानी थी, वह चार माह में भी शुरू नहीं सकी है। आपूर्ति का ठेका लेने वाली फर्म की लापरवाही और जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण बच्चों को जमीन पर ही बैठना पड़ रहा है। अमर उजाला में समाचार प्रकाशन होने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों नींद खुली और उन्होंने फर्म के खिलाफ कार्रवाई शुरू करते हुए अंतिम नोटिस जारी कर दिया है।
प्रदेश सरकार द्वारा जनपद के कुल 95 परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को बैठने के लिए फर्नीचर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। शासन की मंशा थी कि ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त होने के पहले सभी चयनित विद्यालयों में फर्नीचर की आपूर्ति हो चाए, लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। एक माह में होने वाली आपूर्ति चार माह में भी पूरी नहीं हो सकी है। जबकि मई माह में डीएम की अध्यक्षता में गठित फर्नीचर सत्यापन समिति द्वारा फर्नीचर के नमूने का सत्यापन करके पास कर दिया था। शासन ने तो बच्चों को फर्नीचर उपलब्ध करा दिया है, लेकिन ठेकेदार की लापरवाही व जिला बेसिक शिक्षा विभाग व जिला प्रशासन के अधिकारियों की उदासीनता के चलते बच्चे इस बरसात के मौसम में भी जमीन पर ही बैठने को मजबूर हैं। अमर उजाला ने बच्चों का होने वाली समस्या को अधिकारियों के संज्ञान में लाने और अधिकारियों का नींद से जगाने के लिए विगत 09 अगस्त के अंक में ‘स्कूलों में नहीं हो रही फर्नीचर की आपूर्ति’ नामक शीर्षक से प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद चेते जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मायाराम ने आपूर्ति करने वाली फर्म को कारण बताओ नोटिस जा कर दिया है। नोटिस में बताया कि है बार-बार नोटिस जारी करने और आपूर्ति के लिए अतिरिक्त दिनों की मोहल्लत देने के बाद भी विद्यालयों में आपूर्ति नहीं की गई है। आगे की कार्रवाई के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कारण बताया नोटिस जारी करने स्पष्टीकरण तलब है किया है।
अधिकारी बनाए हुए है महरबानी
एक माह में फर्नीचर आपूर्ति का कार्य पूर्ण होना था। आपूर्ति का कार्य पूर्ण होने की बात तो दूर चार माह बीतने के बाद भी फर्म ने विद्यालयों में फर्नीचर की आपूर्ति करने की शुरुआत भी नहीं की है। कार्रवाई करने के नाम पर विभागीय व जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई के नाम पर केवल कागजी घोड़ा दौड़ा रहे हैं और आपूर्ति के लिए बार-बार मोहलत दे रहें हैं। फर्नीचर की आपूर्ति के लिए विभाग ने अप्रैल माह में टेंडर प्रक्रिया पूरी करके झांसी की एक फर्म को आपूर्ति का ठेका दिया था और 13 अप्रैल को अनुबंध पत्र जारी करके अगले एक माह के भीतर आपूर्ति करने के निर्देश दिए थे। यह समयसीमा बीतने के बाद 24 मई को फर्नीचर का नमूना सत्यापन के लिए उपलब्ध कराया। इसके बाद डीएम की अध्यक्षता में गठित सत्यापन समिति ने नमूने का सत्यापन करके उसको पास कर दिया था। इसके बाद दोबार विभाग ने आपूर्ति करने के लिए फर्म को एक माह की मोहलत देते हुए 01 जुलाई से पहले फर्नीचर की आपूर्ति करने के निर्देश दिए। लेकिन इसके बाद भी फर्म द्वारा फर्नीचर की आपूर्ति की शुरुआत नहीं की गई तो अमर उजाला ने 07 जुलाई के अंक में समाचार प्रकाशित किया था, इसके बाद अधिकारी चेते और उन्होंने फर्म को नोटिस जारी एक माह तक का समय और दे डाला। अधिकारियों की यह मेहरबानी यहां पर भी समाप्त नहीं हुई है। हाल ही में 11 अगस्त को बीएसए ने फिर से नोटिस जा कर दिया है और उसमें भी आपूर्ति नहीं होने का जबाव मांगा है। इस बार अधिकारी इस मामले को लेकर कितने गंभीर है, यह भी जल्द ही पता चल जाएगा।
सात लाख की हो सकती है जमानत जब्त
तय समय सीमा या फिर मानकों के अनुसार फर्म आपूर्ति नहीं करती है, नियमानुसार व शर्तानुसार फर्म का अनुबंध निरस्त किया जा सकता है। इसके बाद नियम के अनुसार सबसे कम बोली वाली दूसरे नंबर की फर्म को काम दिया जाता है। अब यह अधिकारियों पर निर्भर करता है कि वह यह अनुबंध निरस्त करके दूसरी नंबर वाली फर्म को आपूर्ति का काम देते हैं, या फिर उसी फर्म को और दिनों की मोहलत देते हैं। या फिर यह पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाती है। इस सब का खामियाजा केवल बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
फर्म को नोटिस जारी करने स्पष्टीकरण मांगा गया है। जवाब देने के लिए 14 अगस्त तक का समय दिया गया है। इसके बाद समिति निर्णय लेगी कि आगे क्या कार्रवाई करनी है।
- मायाराम, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, ललितपुर।