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जाली दस्तावेज उजागर होने पर आंगनबाडी कार्यकर्ता बर्खास्त

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जाली दस्तावेज उजागर होने पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बर्खास्त
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आवेदन के दौरान छिपा ली थी वास्तविक उम्र
दस साल की नौकरी के उपरांत मामला हुआ उजागर
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
नगर क्षेत्र की एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को वास्तविक उम्र छिपाकर नौकरी करना महंगा पड़ गया। मामला उजागर होने पर डीएम ने बाल विकास परियोजना अधिकारी की जांच आख्या पर उसे बर्खास्त कर दिया है। अब वह उम्मीद लगाए न्यायालय की चक्कर लगा रही है।
नगर क्षेत्र में 142 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। वर्ष 2007 में इन केंद्रों पर कार्यकर्ता एवं सहायिका की नियुक्ति की गई थी। इस दौरान नदीपुरा केंद्र पर सुधा श्रीवास्तव ने कार्यकर्ता पद के लिए आवेदन किया था। उसने अपनी उम्र वर्ष 1961 की जगह 1963 दर्शा दी। जिसके आधार पर उसे नौकरी मिल गई। दस साल तक उसकी नौकरी बिना किसी अवरोध के चलती रही। इसी दौरान उसका पारिवारिक विवाद हो गया, जिसके बाद शिकायतकर्ता ने उसकी उम्र में गड़बड़ी होने की शिकायत डीएम से की। जिस पर डीएम ने बाल विकास परियोजना अधिकारी बच्चूलाल गुप्ता को इसकी गहराई से पड़ताल करने के निर्देश दिए। उन्होंने पूरे मामले को खंगाला तो पाया कि उस समय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की भर्ती में न्यूनयम उम्र 21 से 45 वर्ष रखी गई थी। अभ्यर्थिनी की उम्र नौकरी में बाधक बन रही थी। जिस पर उसने अपनी दो वर्ष उम्र कम दर्शा दी और इस आधार पर उसे नौकरी भी मिल गई। लेकिन जब जांच बैठी तो जांचकर्ता द्वारा दिए गए नोटिस का जवाब नहीं दे सकी। अंतत: उसे नौकरी से हाथ धोना पड़ा। बाल विकास परियोजना अधिकारी बच्चूलाल गुप्ता का कहना है कि डीएम मानवेंद्र सिंह ने उसकी सेवा समाप्त कर दी है।
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कार्यकर्ता को हटाकर फाइल कर दी बंद
बाल विकास परियोजना में आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र एवं निवास प्रमाण पत्र का सत्यापन कराया जाता है लेकिन योग्यता प्रमाण पत्रों की जांच नहीं कराई जाती है। इसकी जांच तभी होती है जब योग्यता प्रमाण पत्रों की वैधता की कोई शिकायत करें। यही कारण रहा कि दस सालों तक उसकी नौकरी चलती रही। जानकारों का कहना है कि विभाग में यह अकेला प्रकरण नहीं है। यदि अन्य के योग्यता प्रमाण पात्र खंगाले जाएं तो कइयों की नौकरी पर तलवार लटक जाएगी।
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अनसुलझे सवालों पर नहीं बोल रहा कोई
किसी भी नौकरी में सत्यापित दस्तावेजों के आधार पर नौकरी अभ्यर्थी को दी जाती है। लेकिन इस मामले में उस समय की चयन समिति ने जन्म प्रमाण पत्र पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया। जिससे यह मामला नासूर बन गया। उस समय की चयन समिति में बाल विकास परियोजना अधिकारी, अल्पसंख्यक वर्ग का अधिकारी व डीएम द्वारा नामित अधिकारी रखे गए थे। अब इस मामले में पूरी चयन समिति सवालों के घेरे में फंस गई है। नियुक्तिकर्ता के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं होने के मामले में जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेंद्र प्रताप का कहना है कि पत्रावली देखकर ही कुछ कह पाएंगे। वह पूरे मामले में गोलमोल जवाब देते नजर आए।
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