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अनसन पर बैठा परिवार तब किया मुकदमा दर्ज

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अनशन पर बैठा परिवार तब किया मुकदमा दर्ज
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ललितपुर।
एक हफ्ते पहले चुनावी रंजिश को लेकर घर में घुसकर मारपीट करने और रुपये लूट ले जाने के मामले में आखिरकार पीड़ित परिवार के अनशन पर बैठने के बाद मुकदमा दर्ज कर लिया है। पीड़ित ने सपा के पूर्व जिला अध्यक्ष के पुत्रों सहित तीन लोगों द्वारा चुनावी रंजिश के चलते घर में घुसकर मारपीट कर रुपये लूट ले जाने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की थी। पुलिस और प्रशासन की ओर से सुनवाई न होते देख पीड़ितों को अनशन पर बैठना पड़ा। मुकदमा दर्ज होने के बाद अनशन समाप्त हो गया।
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प्रदेश सरकार और पुलिस के आला अधिकारी सभी पीड़ितों का मुकदमा दर्ज करने बात कहते रहते हैं। लेकिन स्थानीय पुलिस को उच्चाधिकारियों के निर्देशों की धज्जियां उड़ाना रास आता है। ऐसा ही मामला शहर क्षेत्र के मुहल्ला तालाबपुरा निवासी आकाश पुत्र गंगाराम सेन के साथ हुआ। पीड़ित के साथ एक हफ्ते पहले मारपीट और लूट की घटना हुई थी। इसके बाद वह कोतवाली, एसपी और डीएम के पास गया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उसे मजबूरन अनशन पर बैठना पड़ा। मामला उछलते देख पुलिस को मुकदमा दर्ज भी करना पड़ा। पीड़ित आकाश पुत्र गंगाराम ने बताया कि तीन दिसंबर की रात जब वह घर पर था और बहन की शादी की तैयारियों में परिवार के लोग जुटे हुए थे। इसी दौरान मुहल्ले के निवासी और सपा के पूर्व जिला अध्यक्ष कैलाश यादव के पुत्र हरीसिंह और धर्मेंद्र सिंह व उनके साथी लल्ले पुत्र शिवचरन शर्मा घर में घुस आये और गाली-गलौज कर मारपीट करने लगे। चीखपुकार सुन उसकी मां जब बचाने आई तो आरोपी उसके साथ मारपीट कर चार हजार रुपये लूट कर भाग गए। जब पीड़ित ने आरोपी के भाई भवानी व पिता कैलाश को उलाहना दिया तो एक बार फिर दोनों ने उनके साथ मारपीट कर जान से मारने की धमकी दे डाली। पीड़ित ने जब इसकी सूचना कोतवाली पुलिस को दी तो पुलिस ने चिकित्सीय परीक्षण करवाकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इसके बाद पीड़ित प्रार्थनापत्र लेकर उच्चाधिकारियों तक फिरता रहा, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। करीब एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी पुलिस की ओर से कार्रवाई न होते पीड़ित को परिवार सहित घंटाघर पर धरने पर बैठना पड़ा। यह सूचना मिलते ही कोतवाली प्रभारी ने परिवार को अपने झांसे में लेने की कोशिश की। लेकिन बात न बनते देख और पीड़ित परिवार द्वारा आत्मदाह की धमकी देने पर कोतवाली प्रभारी बैकफुट पर आ गए और मुकदमा दर्ज कर लिया। देर शाम मुकदमा दर्ज होने के बाद पीड़ित परिवार ने आमरण अनशन तोड़ दिया।
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