आधा दर्जन ससुरालियों को सजा
दहेज की मांग को प्रताड़ित करने पर बहू ने की थी आत्महत्या
छह वर्ष पुराने मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम ने सुनाया निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। बहू को दहेज की मांग के लिए प्रताड़ित करने और आत्महत्या को उकसाने में दोषी आधा दर्जन ससुरालियों को दोषी पाते हुए अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम मनोज कुमार शुक्ला की अदालत ने पांच-पांच वर्ष का सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यही नहीं आठ-आठ हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया।
सहायक शासकीय अधिवक्ता लखनलाल यादव ने बताया कि छह वर्ष पूर्व झांसी जिला के थाना उलदन अंतर्गत ग्राम चढ़रऊ निवासी ने थाना पूराकलां में तहरीर देते हुए बताया कि उसने अपनी पुत्री गायत्री की शादी घटना से आठ माह पूर्व हैसियत के अनुसार थाना पूराकलां अंतर्गत ग्राम विजयपुरा निवासी भागीरथ के साथ की थी। लेकिन, शादी के बाद से ही ससुराली उसकी पुत्री को दहेज के लिए परेशान करने लगे थे और एक मोटरसाइकिल व पचास हजार रुपये की मांग पूरी नहीं करने पर जान से मारने की धमकी दी थी। इसी के चलते छह फरवरी 2011 को शाम चार बजे उसके ससुराली पति भागीरथ, भाई सुखराम, सास सरजू, जेठानी खिलौना के अलावा अन्य ससुराली आनंदी, शीला व बाबू ने दहेज की मांग पूरी न होने पर पिटाई कर मार डाला है। जानकारी मिलने पर देर रात जब वह अपनी पुत्री के ससुराल पहुंचा तो उसकी पुत्री की लाश जमीन पर पड़ी थी। उसकी पुुत्री ने मरने के पूर्व उसे फोन से ससुरालियों द्वारा दहेज की खातिर जान से मारने की आशंका जताई थी।
पुलिस ने उक्त मामले में रिपोर्ट पंजीकृत कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर दिए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। मंगलवार को अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट की अदालत ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट व पंचायतनामा के गवाहों के बयानों, अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों व साक्ष्यों के आधार पर यह मामला दहेज की खातिर आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का माना। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गायत्री की मौत फांसी से होने की पुष्टि हुई थी। उक्त मामले में मृतका को खिड़की तोड़कर बाहर निकाला गया था, जबकि ससुरालियों द्वारा अपने बचाव में गायत्री की मौत बीमारी के कारण होना बताया था। न्यायालय ने इससे आरोपियों के उक्त तथ्यों को मिथ्या पाते हुए यह मामला आत्महत्या को प्रेरित करने का पाया। इसी आधार पर न्यायालय ने उक्त मामले में अभियुक्त भागीरथ, सुखराम, सरजू, खिलौना, शीला व बाबू को दहेज के लिए प्रताड़ित करने, आत्महत्या को प्रेरित करने व दहेज की मांग करने में दोषी पाते हुए पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यही नहीं प्रत्येक पर आठ-आठ हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर आठ-आठ माह की अतिरिक्त सजा भी भुगतनी होगी। उक्त मामले में न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत करने से पूर्व ही एक अन्य अभियुक्त आनंदी की मृत्यु हो गई थी।