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नाबालिका को आत्महत्या के लिए उकसाने में अभियुक्त को दस वर्ष की जेल

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आत्महत्या के लिए उकसाने पर दस वर्ष की जेल
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दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। नाबालिग की बदनामी कर उसे आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) अजय पाल सिंह की अदालत ने थाना नाराहट अंतर्गत ग्राम गुढ़ा बुजुर्ग निवासी एक अभियुक्त को दस वर्ष के सश्रम कारावास और दस हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
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सहायक शासकीय अधिवक्ता बादाम सिंह यादव ने बताया कि आठ वर्ष पूर्व थाना नाराहट अंतर्गत एक ग्राम निवासी एक व्यक्ति ने पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि उसकी 16 वर्षीय नातिन कक्षा 12 में महरौनी में पढ़ रही थी और नाराहट रोड में कमरा लेकर रह रही थी। 13 जून वर्ष 2013 को महरौनी से उसकी नातिन गांव के ही शेर सिंह पुत्र जगपाल सिंह के साथ न समझी के कारण कहीं बाहर घूमने चली गई थी और एक हफ्ते के बाद वह वापस गांव आ गई थी। जिस दिन से गांव वापस आई थी उस दिन से गांव के शेर सिंह, जगपाल सिंह, रघुराज सिंह, चार्ली राजा, केहर सिंह व महेंद्र सिंह बराबर ताने मार रहे थे कि हमारे परिवार की बहू बनना चाहती हो। अपने और अपने पिता की हैसियत देखो। उपरोक्त लोग पूरे गांव में घूम-घूमकर उसके चरित्र पर टिप्पणी करके बदनामी कर रहे थे कि उसकी नातिन व उसके परिवार के लोगों द्वारा हाथ जोड़कर काफी समझाया कि लड़की की बदनामी न करें, अभी बच्ची है। उसका भविष्य खराब न करें। उपरोक्त लोग नहीं माने और बराबर बदनामी कर रहे थे और वह बदनामी व भविष्य के भय में दो-तीन दिन से गुमसुम रही थी। लाख समझाने भी ठीक से खाना पीना नहीं खा रही थी। अपनी मां व पिता से कह रही थी कि आगे कैसे पढ़ पाऊंगी और उसकी शादी कौन करेगा। उसका जीवन बर्बाद हो गया। उपरोक्त लोगों की प्रताड़ना से तंग आकर कल दो अगस्त 2013 को उसका पूरा परिवार घर में मौजूद था कि उसकी नातिन ने अचानक कमरे में लगभग छह बजे सुबह अपने ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली । चीखपुकार सुनकर उसके परिवार के लोग उसे बचाने दौड़े। आग बुझाने के बाद उसके पिता व उनके पिता भी झुलस गए। तत्काल उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल ले गए, जहां उसने तड़पते हुए उपरोक्त लोगों का चीख-चीख कर नाम लेते हुए कहा कि इनकी वजह से वह मरना चाह रही है और इलाज के दौरान लगभग 11 बजे उसकी मृत्यु हो गई थी। मृत्यु पूर्व बयानों में भी मृतका किशोरी ने जगपाल सिंह पर मारपीट और गांव में बदनामी करने की वजह से दो अगस्त 2013 को मिट्टी का तेल डालकर आग लगाने की बात कही थी। पुलिस ने उक्त मामले में ग्राम गुढ़ा बुजुर्ग निवासी सभी छह आरोपियों शेर सिंह, जगपाल सिंह, रघुराज सिंह, चार्ली राजा, केहर सिंह व महेंद्र सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। इसके बाद पुलिस ने विवेचना उपरांत तीन अभियुक्तों शेर सिंह, जगपाल सिंह व केहर सिंह के विरुद्घ न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। बृहस्पतिवार को न्यायालय व्ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए एक अभियुक्त जगपाल सिंह को धारा 305 में दोषी पाते हुए दस वर्ष के कठोर कारावास और दस हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं न्यायालय में दो अन्य अभियुक्तों शेर सिंह व केहर सिंह को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।
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