प्राणघातक हमले में 19 को पांच-पांच साल की सजा
- एक लाख इकहत्तर हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया
- मसौराखुर्द में फसल काटने को लेकर हुआ था विवाद
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। अपर सत्र न्यायाधीश (प्रथम) उमेश कुमार सिरोही की अदालत ने मसौराखुर्द गांव में 11 साल पहले उड़द की फसल काटने को लेकर दो पक्षों में हुए विवाद में मंगलवार को फैसला सुनाया है। कोर्ट ने प्राणघातक हमले में दोनों पक्षों के कुल 19 अभियुक्तों को दोषी पाते हुए पांच-पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। साथ ही कुल एक लाख इकहत्तर हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। फैसले में एक पक्ष के 11 और दूसरे पक्ष के आठ अभियुक्तों को सजा सुनाई गई। जबकि दोनों पक्षों में शामिल एक-एक अभियुक्तों की मुकदमे की विवेचना के दौरान मौत हो चुकी है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता बादाम सिंह यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि मसौराखुर्द निवासी कलंदर सिंह पुत्र हरिश्चंद्र ने थाना कोतवाली को तहरीर देकर बताया था कि वह गजरादेवी पुत्री हिंदूपत से जमीन का मुकदमा तहसील से जीत गया था। उस जमीन में उसने उड़द की फसल बोई थी। जिसे वह 6 सितंबर 2007 को दिन में 11 बजे और परिवार के नरेंद्र सिंह पुत्र मूरत सिंह, महेश पुत्र मूरत सिंह, मूरत सिंह पुत्र हरिश्चंद्र, मानवेंद्र सिंह पुत्र विक्रमादित्य, देवेंद्र सिंह पुत्र कलंदर सिंह, राजकुमार पुत्र कलंदर सिंह आदि के साथ फसल काट रहे थे। तभी दूसरे पक्ष के सुरेश लाठी, हल्के कुल्हाड़ी, फरसा लेकर माधव हाकू, बहादुर, रामकृष्ण, बब्लू, पहलवान व रघुवीर के साथ आकर गाली-गलौज करने लगे। विरोध करने पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया। जिसमें मूरत सिंह, नरेंद्र सिंह, महेश, राजकुमार, देवेंद्र व कलंदर, मानवेंद्र सिंह को चोटें आईं। कलंदर की तहसील पर पुलिस ने सभी आरोपियों पर प्राणघातक हमले की रिपोर्ट दर्ज की थी। विवेचना के बाद मामले में सभी अभियुक्तों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र पेश किए गए थे। तब से मामला न्यायालय में विचाराधीन था। मंगलवार को अभियोजन पक्ष की ओर पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर न्यायालय ने मामले में शामिल 11 अभियुक्तों माधव, बब्लू, रामकृष्ण, शिवराज सिंह, हाकू, सुरेश, रघुवीर, हल्के, बहादुर, पहलवान व बड़े उर्फ रामकुमार को दोषी पाते हुए सभी अभियुक्तों को पांच-पांच वर्ष की सजा सुनाई है। प्रत्येक पर कुल नौ-नौ हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। मामले में शामिल एक अन्य अभियुक्त पृथ्वीपत की मुकदमे की विवेचना के दौरान मृत्यु हो चुकी है।
वहीं दूसरे पक्ष की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता खुशीलाल लोधी ने बताया कि मसौराखुर्द गांव निवासी क्रांतिदेवी पत्नी पहलवान सिंह ने थाना कोतवाली में दी तहरीर में बताया था कि उसके पति पहलवान सिंह व शिवराज सिंह व बहादुर सिंह पुत्र दिल्लीपत ने मिलकर गजरा देवी का 12 एकड़ खेत ठेके पर लिया था। जिसमें उन्होंने उड़द की फसल बोई थी। 6 सितंबर 2007 को 11 बजे दिन में कलंदर, मानिकचंद्र पुत्र विक्रमादित्य पहले से फसल को काट रहे थे। जिस पर उसके जेठ बहादुर ने फसल काटने से मना किया तो महेश ने बहादुर पर तमंचा लगाने का प्रयास किया। विरोध करने पर महेश गाली-गलौज करने लगा। इस बीच महेश ने तमंचे से फायर कर दिया, जो बहादुर को लगने से वह जमीन पर गिर पड़ा। बहादुर की आवाज सुनकर उसके पति पहलवान सिंह, बब्लू, रामकेश उर्फ रामकिशन, माधव बहादुर की ओर भागे। इस पर अभियुक्त नरेंद्र, माधव, राजकुमार, कलंदर, मूरत सिंह, देवेंद्र सिंह व मानवेंद्र सिंह फरसा, कुल्हाड़ी व सांग लेकर सभी लोगों को मारने लगे। दो पक्षों में मारपीट हुई। गोली लगने पर बहादुर की स्थिति नाजुक हो गई। मारपीट में माधव सिंह, पहलवान, रामकेश, बल्लू, हाकिम आदि को चोटें आईं। गजरा देवी की जमीन का विवाद का मुकदमा कलंदर आदि से चल रहा था, जिसमें गवाही बहादुर सिंह ने दी थी। जिसमें बहादुर सिंह व उसके परिवार वालों से रंजिश मानते थे। तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। विवेचना के दौरान विक्रमादित्य का नाम भी प्रकाश में आया था। जिसके बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किए थे। तब से मामला न्यायालय में विचाराधीन था। मंगलवार को मामले में अभियोजन पक्ष की दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर न्यायाधीश ने अभियुक्त महेश, विक्रमादित्य, नीरज, नरेंद्र, राजकुमार, देवेंद्र, कलंदर व मानवेंद्र सिंह को दोषी पाते हुए पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास और प्रत्येक पर नौ-नौ हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर पांच-पांच माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। उक्त मामले में मूूरत की मृत्यु हो चुकी है।
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सजा सुनने पर एक दूसरे को कोसते रहे दोनों पक्ष
मसौराखुर्द में फसल काटने को लेकर प्राणघातक हमले में दोषी करार होने और सजा सुनाए जाने के बाद दोनों पक्षों के सभी अभियुक्त एक दूसरे को कोसते रहे। यहां तक कि कुछ अभियुक्त तो रोते हुए उस दिन को कोसते रहे जब वह दूसरे के कहने पर वहां गए थे।