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गैंगस्टर के दो अपराधियों को सात-सात वर्ष की सजा

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गैंगेस्टर के दो दोषियों को सात-सात वर्ष की सजा
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दस-दस हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
थाना जखौरा अंतर्गत ग्राम मैलवारा निवासी दो अभियुक्तों को अपर जिला और सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम/विशेष न्यायाधीश गिरोह बंद अधिनियम) मनोज कुमार शुक्ला की अदालत ने सात-सात वर्ष के कठोर कारावास और दस-दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर अभियुक्तों को 10-10 माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
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सहायक शासकीय अधिवक्ता लखनलाल यादव ने बताया कि थाना कोतवाली प्रभारी निरीक्षक मंगला प्रसाद तिवारी ने चार वर्ष पूर्व कोतवाली पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि 24 जून 2014 को वह ग्राम मैनवार में गश्त कर रहे थे, तो ग्रामीणों ने बताया था कि राजपाल एक संगठित गिरोह बनाए हुए है, जिसका वह खुद लीडर है और इस गिरोह में शंकर सिंह भी है। राजपाल अपने व गिरोह के भौतिक व आर्थिक लाभ के लिए हत्या, मारपीट, नाजायज तरीके से अवैध धन अर्जित करना, गालीगलौज आदि अपराधों को अंजाम देते हैं। इससे आम जनता में भय है। जनता का कोई भी व्यक्ति इनके खिलाफ गवाही देने से कतराता है। पुलिस व न्यायालय में गवाही देने से कतराता है। एक अप्रैल 2014 को दोनों ने ग्राम मैनवार के चंद्रप्रकाश खरे पुत्र मनोहर लाल की हत्या कर दी थी। जिस पर उक्त दोनों के खिलाफ हत्या का मुकदमा पंजीकृत किया गया था। पांच अप्रैल 2014 को उक्त दोनों ने खिलान सिंह पुत्र मूरत सिंह निवासी मैनवार को गालीगलौज कर मुकदमे में गवाही देने पर जान से मारने की धमकी दी थी। इस मामले में भी उक्त लोगों के खिलाफ गाली गलौज देने और जान से मारने की धमकी के मामले में भी मुकदमा पंजीकृत कराया गया था। तब से दोनों जेल में थे। थाना कोतवाली प्रभारी निरीक्षक की तहरीर पर उक्त दोनों के खिलाफ गैंगेस्टर की कार्रवाई की संस्तुुति के बाद न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए गए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। बुधवार को न्यायाधीश ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए निर्णय सुना दिया।
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