रानीबाग, अब सरकार पहुंची कमिश्नरी न्यायालय
दो वर्ष पुराने आदेशों के खिलाफ दायर की निगरानी अपील
डीएम की जांच रिपोर्ट में पाया गया है जमीन का फर्जीबाड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। रानीबाग प्रकरण में जिलाधिकारी द्वारा गठित चार सदस्यीय जांच रिपोर्ट में फर्जीबाड़े का खुलासा होने के बाद अब सरकार की ओर से कमिश्नरी न्यायालय में दस्तक दी गई है। दो वर्ष पुराने तत्कालीन जिलाधिकारी और एसडीएम के आदेशों को निरस्त करने की मांग को लेकर वर्तमान जिलाधिकारी की ओर से कमिश्नरी न्यायालय में निगरानी अपील दायर की गई है। इसमें जगदीश शरण व नगर पालिका समेत 19 लोगों को विपक्षी बनाया गया है।
जिलाधिकारी ललितपुर द्वारा आयुक्त न्यायालय झांसी मंडल में दायर निगरानी अपील में बताया गया है कि रानीबाग प्रकरण में जगदीश शरण बनाम स्टेट के अंतर्गत धारा-5 मैनुअल में पारित तत्कालीन जिलाधिकारी के 10 अप्रैल 2015 के आदेश के खिलाफ अपील दायर की गई, इसमें बताया गया है कि तत्कालीन जिलाधिकारी 10 अप्रैल 2015 का पारित आदेश साक्ष्यों व तथ्यों एवं नियमों के विपरीत गैर कानूनी क्षेत्राधिकार के बाहर जाकर और न्याय की मंशा के विपरीत है। यह आदेश स्थिर रहने योग्य नहीं है। यह आदेश आवेदक रेस्पोण्डेंट के आवेदन के अंतर्गत धारा-5 नलूज मैनुअल पर पारित किया गया है और आदेश के द्वारा खतौनी के इंद्राज को खारिज किया गया है। जबकि, नजूल मैनुअल के पैरा 5 में नजूल रजिस्टर के इंद्राजों में परिवर्तन या भूल सुधार का प्रावधान है। इस वजह से भी प्रश्नगत आदेश कानूनी नहीं है। यह आदेश रेस्पोण्डेंट के जिला प्रार्थनापत्र के आधार पर पारित किया गया है, वह प्रार्थना पत्र विधि एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुरुप नहीं है। प्रार्थना पत्र में पक्षकारों की स्थिति को नहीं दर्शाया गया है। उक्त मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी के आदेश के पूर्व संबंधित पक्षकारों निगरानीकर्ता को न तो नोटिस ही जारी किए गए और न ही आपत्ति, सुनवाई और साक्ष्य का कोई अवसर प्रदान किया गया, न ही निगरानीकर्ताओं को सुना गया और जल्दबाजी में सीमित समय में ही उक्त आदेश पारित कर दिया गया था। यह जमीन एक लंबे अंतराल से खतौनी में नजूल भूमि अंकित है और बंदोबस्त 1347 फसली में भी खाता खेवट 53 नजूल मैनुअल नगर पालिका प्रबंध में दर्ज है। बंदोबस्त की एंट्री को पैरा 5 नजूल मैनुअल के तहत चुनौती नहीं दी जा सकती है और न ही ऐसी एंट्री को खारिज किया जा सकता है। उक्त भूमि पर विपक्षी बिना किसी पट्टे के और बिना किसी अनुमति के उक्त जमीन पर काबिज हैं। विंध्य प्रदेश की भूमि के विनियम में उत्तर प्रदेश सरकार को कोई संपत्ति नहीं मिली है, जबकि इंवेंट्री सूची में यह संपत्ति स्टेट की संपत्ति दर्शित की गई है। इस वजह से उक्त आवेदकों का कोई अधिकार उक्त भूमि पर नहीं है। आठवें बिंदु में कहा गया है कि आवेदक के द्वारा दिए प्रार्थनापत्र के समर्थन में कोई अभिलेखीय साक्ष्य एवं विधिक व्यवस्था प्रार्थना पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया है। जिलाधिकारी स्टेट की ओर आयुक्त न्यायालय में निगरानी अपील में उक्त जांच रिपोर्ट के बाद 16 अक्टूबर को दायर करते हुए दो वर्ष पूर्व तत्कालीन जिलाधिकारी और एक डेढ़ वर्ष पूर्व तत्कालीन जिलाधिकारी के आदेश गुण दोषों के आधार पर निरस्त करने की मांग की है। बता दें कि उक्त रानीबाग के प्रकरण में विगत आठ अक्टूबर को जिलाधिकारी द्वारा चार सदस्यी जांच कमेटी के आधार पर तत्कालीन जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी के उक्त मामले में दिए आदेशों को कूट रचनाएं माना है और उक्त भूमि पर काबिज करीब एक दर्जन से अधिक लोगों भूमाफिया घोषित किया गया है।
रानी बाग प्रकरण में दो वर्ष पूर्व तत्कालीन जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी के आदेश के खिलाफ सरकार की ओर से निगरानी अपील झांसी कमिश्नरी में दायर की गई है।
हेमंत कुमार चौधरी, तहसीलदार, ललितपुर।