पिता के हत्यारे को आजीवन कारावास
ललितपुर। एक वर्ष पूर्व कस्बा बांसी में जमीन की खातिर पिता की हत्या करने में दोषी पुत्र को अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम मनोज कुमार शुक्ला की अदालत ने आजीवन कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता लखनलाल यादव ने बताया कि एक वर्ष पूर्व बांसी निवासिनी बैनीबाई पत्नी हरी सिंह ने थाना जखौरा में तहरीर देकर बताया था कि आठ जून वर्ष 2016 की रात्रि करीब आठ-नौ बजे वह अपने पति के साथ बांसी-बार रोड पर सिद्घन नामक स्थान के सामने अपने खेत पर बने मकान में थी, तभी उसका पुत्र भागीरथ वहां आया और उसके पति हरी के साथ मारपीट करने लगा और कहने लगा कि तुम अपनी जमीन बेचने को गांव में कई व्यक्तियों से बात कर रहे हो। इस बात से नाराज उसने हरी को पीटना शुरू कर दिया। जब उसने (बैनीबाई) ने पति को बचाया तो उसे भी धक्का दे गया। उसने यह भी बताया कि उसका पुत्र उसे जान से मारना चाह रहा था, जिससे वह किसी प्रकार वहां से बचकर भाग निकली और घर के पास से निकली नदी की तलहटी में रात गुजारी। सुबह होने पर जब वह वापस आई तो उसे पति की मृत्यु की जानकारी हुई। बैनीबाई ने अपने ही एक पुत्र भागीरथ पर पति हरी की हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस में तहरीर दी थी, इस पर पुलिस ने भागीरथ पर हरी की हत्या का मामला दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए थे। पुत्र द्वारा ही पिता की हत्या करने का यह मामला पूरे कस्बे में चर्चा का विषय बना रहा। शुक्रवार को न्यायालय ने उक्त मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए अपने निर्णय में अभियुक्त भागीरथ को आजीवन कारावास की सजा सुना दी।
जमीन न बेचने का डाला था दबाव
मृतक हरी कुशवाहा के दो पुत्र मोहन और भागीरथ हैं। इसके बाद भी हरी अपनी पत्नी बैनीबाई के साथ अपने खेत पर बने मकान पर रहता था। हालांकि एक पुत्र मोहन ही अपने माता पिता के लिए घर से खाना बनाकर खेत पर भेजता था, जबकि भागीरथ अलग रहता था और वह अपने पिता को जमीन न बेचने का दबाव भी डालता था और पिता जमीन बेचना चाह रहा था। यही कारण है कि कलयुगी पुत्र भागीरथ ने जमीन की खातिर अपने ही पिता की हत्या कर दी थी।