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फांसी-आजीवन कारावास की सजा के डर से बंदी ने किया आत्महत्या का प्रयास

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ललितपुर। जिला कारागार में पत्नी की हत्या के मामले में जेल में निरुद्ध चल रहे थाना बार क्षेत्र के ग्राम मथुराडांग निवासी बहादुर राजपूत ने आजीवन कारावास या फांसी की सजा होने के डर से खुद को गर्दन पर चोट पहुंचाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया। जिला कारागार प्रशासन ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया।
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ग्राम मथुराडांग निवासी बहादुर राजपूत की पत्नी राधा जून माह में ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में जल गई थी। उपचार के दौरान 17 दिन बाद उसकी मौत हो गई। मायके पक्ष के लोगों की शिकायत पर बार थाना पुलिस ने बहादुर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जून माह में ही उसे जेल भेज दिया था। उधर, जेल में कुछ दिन रहने के बाद बहादुर मानसिक रूप से परेशान रहने लगा। इस दौरान अन्य कैदियों से बातचीत होने पर उसे आशंका होने लगी कि पत्नी की हत्या के मामले में वह कभी जेल से नहीं छूट सकेगा और उसे आजीवन कारावास या फांसी की सजा हो जाएगी।
इसी आशंका के चलते उसने एक सप्ताह पहले जेल की दीवारों पर लगे कटीले तारों वाले जिंगलों के जरिए अपनी गर्दन को चोट पहुंचाकर आत्महत्या का प्रयास किया। इसी दौरान वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने उसे देख लिया और पकड़कर जिला अस्पताल भेजकर उपचार कराया, जहां उसे ठीक होने पर चिकित्सकों की देखरेख में भर्ती कर लिया गया और सुरक्षा तैनात कर दी गई। सोमवार को उसके ठीक होने पर अस्पताल से छुट्टी कर दी गई, जिस पर उसे वापस जिला कारागार भेजा गया।
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पत्नी की जलाकर हत्या के मामले में निरुद्घ एक बंदी ने जेल से कभी रिहा नहीं होने और आजीवन कारावास की सजा होने की आशंका के चलते खुद को चोट पहुंचाई थी। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया था, लेकिन अब वह ठीक हो गया है और सोमवार को उसे जिला कारागार वापस भेज दिया गया है।
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-लाल रत्नाकर सिंह, जेल अधीक्षक।
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