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कोरोनाकाल में ईट बनाकर पेट पाल रहे श्रमिक

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कारीटोरन। कोरोना काल में श्रमिक ईट बनाकर अपना पेट पाल रहे हैं। ब्लॉक बार के अंतर्गत ग्राम कारीटोरन में कोरोना की दूसरी लहर ने अधिकतर श्रमिकों का रोजगार छीन लिया है। जो श्रमिक महानगरों में काम कर रहे थे, अब वह अपने गांव में लौट आए हैं। कृषि कार्य न के बराबर रह गया है, ऐसे में लोग गांव में ईट (गुम्मा) बनाकर जीवनयापन कर रहे हैं। मनरेगा का हाल बुरा है, इसमें भी लोगों को समय से काम नहीं मिल पा रहा है। श्रमिकों का कहना है कि कोरोना की पहली लहर में प्रशासन ने ध्यान देते हुए श्रमिकों को रोजगार मुहैया कराया था, लेकिन इस बार प्रशासन की तैयारी नजर नहीं आ रही है। इस कारण श्रमिकों को खुद ही रोजगार तलाशना पड़ रहा है। गनीमत यह है कि गांव के लोग अपने मकान के निर्माण के लिए ईट बनवा रहे हैं, जिससे रोजगार निकल आया है। वरना, काम मिलना मुश्किल हो जाता।
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