ललितपुर। जनपद में विकास कार्यों की समीक्षा को प्रदेश के भले ही कैबिनेट मंत्री समीक्षा करने के लिए पहुंच रहे हों, लेकिन शहर समेत समूचे ग्रामीण क्षेत्रों की जर्जर सड़कों की हालत जस की तस बनी हुई है। हालत यह है कि नगर की कई प्रमुख सड़कें कच्चे मार्ग में तब्दील हो गई हैं, वाहनों की निकासी में धूल के गुबार उड़ रहे हैं। ऐसे में लोगों को वाहन चलाना तो दूर पैदल चलना तक मुश्किल हो रहा है। ऐसे में समीक्षा बैठकें रस्म अदायगी साबित हो रहीं हैं।
विकास कार्यों को लेकर कुछ माह पहले प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री जितिन प्रसाद से स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर पार्टी के नेताओं ने सड़कों की बदहाल दशा बताते हुए उनके निर्माण कराने की मांग की लेकिन करीब तीन माह बाद भी कोई सड़क मंजूर नहीं हुई है। हैरत की बात तो यह है कि पड़ोसी जनपद टीकमगढ़ के सांसद वीरेंद्र खटीक भी जनपद में आए लेकिन उन्होंने भी यहां के विकास कार्यों से कोई वास्ता नहीं रखा। शहर की मुख्य सड़क पर जहां गड्ढों से वाहनों की आवाजाही करना मुश्किल हो रहा था, अब बारिश खुलने के बाद वाहनों की निकासी से उड़ रही धूल से पैदल चलना तक दूभर हो गया है।
यह हाल नदीपुरा से ढ़ुराबाजार होकर नेहरू महाविद्यालय के आगे से बांध के पूंछा तक बना हुआ है। इसके अलावा पिसनारी व घुसयाना मार्ग का तो फुटपाथ ही गायब हो गया है। पुल तक गड्ढों युक्त हो गया है। सदनशाह से आईटीआई मार्ग की हालत किसी से छिपी नहीं है। बुढ़वार संपर्क मार्ग से जुगपुरा बाईपास मार्ग पूरी तरह से विशाल गड्ढों में बदल गया है। हाईवे से सुरईघाट मार्ग में गड्ढे ही नहीं पत्थर मात्र ही नजर आ रहे हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र में भी सड़कों की दशा खराब बनी हुई है। हद तो तब हो गई, जब लगातार प्रदेश सरकार के मंत्री भ्रमण कर योजनाओं व विकास का खाका जांच रहे हैं, इसके बाद भी सड़कों की हालत में सुधार नहीं हो पा रहा है। इससे मंत्रियों के भ्रमण की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
पांच वर्ष बाद नहीं हो सका सुरईघाट पुल का निर्माण
बीते लगभग पांच वर्ष पूर्व गोविंद सागर बांध का जलस्तर अधिक बढ़ने के चलते गेटों के साथ ही साइफन चालू हो गए थे, इससे नदी में आए पानी से जलकुंभी व कचरा फंसने से चौक हो गया था, पानी के दबाव से पुल पूरी तरह से टूटकर क्षतिग्रस्त हो गया था, तब से अब तक पुल का निर्माण नहीं हो सका है। ऐसे में लोगों को तीन किलोमीटर का अधिक चक्कर लगाकर आना पड़ रहा है। इसके बाद भी अब तक किसी भी जनप्रतिनिधि व अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया है।
जनपद में सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए अभियान चलाकर कार्य कराया जा रहा है। 15 नवंबर तक अधिकांश सड़कें गड्ढा मुक्त हो जाएंगी। - राजेंद्र सिंह, अधिशासी अधिकारी, लोक निर्माण विभाग