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Lalitpur News: और चटख होगी चंदेरी साड़ी, आया 26 करोड़ का निवेश

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संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। चंदेरी सिल्क साड़ी का व्यापार विलुप्त होने की कगार पर था, लेकिन एक जिला एक उत्पाद योजना से यहां सबसे ज्यादा रोजगार हथकरघा उद्योग से जुड़े लोगों को मिला है। हाल में 26 करोड़ का और निवेश प्राप्त हुआ है, इससे और लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद जगी है।
ललितपुर में बनने वाली जरी सिल्क साड़ी काफी प्राचीन है, इसका कार्य लगभग 1400 ईस्वी से होता आ रहा है। यह कार्य धीरे-धीरे कम होता जा रहा था, जिसे बढ़ावा देने एवं पारंपरिक कारीगरों के उत्थान के लिए सरकार ने एक जनपद एक उत्पाद योजना का शुभारंभ किया। इस योजना के अंतर्गत जनपद ललितपुर के लिए चयनित जरी सिल्क साड़ी एक विशिष्ट उत्पाद बना। जरी सिल्क साड़ी पूर्णतया हथकरघा उत्पाद है, इसमें कोई भी इलेक्ट्रिकल मशीनरी का उपयोग नहीं होता है। इस कार्य को करने वाले हस्तशिल्पी पारंपरिक कारीगर हैं। यह कार्य चंदेरी कस्बे से लेकर शहरी एवं विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में होता है। जनपद में लगभग 250-275 हस्तशिल्पी इस कार्य को करते हैं। ये सभी हस्तशिल्पी अति पिछड़े वर्ग व अति कमजोर श्रेणी से आते हैं। जो इसकी बुनाई कर व्यापारियों को साड़ी देते हैं, उन्हें मात्र मजदूरी मिलती है।
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साड़ी की बुनाई करने में प्रत्येक हस्तशिल्पी को छह से 20 दिन का समय लगता है। पारंपरिक करघा का उपयोग करने से इन हस्तशिल्पियों को उपरोक्त कार्य करने में अधिक समय व कम मजदूरी प्राप्त होती है। ओडीओपी योजना आने से पूर्व इन सभी हस्तशिल्पियों को किसी प्रकार का बढ़ावा नहीं मिला न ही कोई विशेष प्रयास हुआ। जनपद में कोई ऐसी बड़ी इकाई पिछले 50 वर्षों में स्थापित नहीं हो पाई, जहां जनपद के हस्तशिल्पी अपनी साड़ी का प्रदर्शन करते। वर्तमान में इस क्षेत्र में दस उद्यमियों ने 45 करोड़ के निवेश के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें करीब 1291 लोगों को रोजगार मिलेगा। धरातल पर अपना निवेश करने के लिए पांच उद्यमी तैयार हो गए हैं, जिन्हें हाल में ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में शामिल किया था। ये पांच उद्यमी करीब 26 करोड़ का निवेश करेंगे। इससे इन हस्त कारीगरों को लाभ मिलेगा।

उद्यमियों के हथकरघा उद्योग में निवेश करने से हस्त कारीगरों को न सिर्फ रोजगार मिला है, बल्कि उनकी कला के लिए उचित प्लेटफार्म भी तैयार होने जा रहा है।
संजय सिंह , सहायक प्रबंधक उद्योग विभाग।
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