संवाद न्यूज एजेंसी
महरौनी। रामलीला महोत्सव के आयोजन में श्रीराम जन्म और ताड़का वध लीला का मंचन हुआ, जिसे देख दर्शक भावविभोर हो गए।
मंचन का शुभारंभ दशानन के अत्याचार से व्याकुल धरती की करुण पुकार के साथ हुआ। श्री हरि विष्णु धरती को पाप के बोझ से मुक्त करने के लिए अवतार लेने का भरोसा दिलाते हैं। इधर, अयोध्या के राजा दशरथ संतान न होने की चिंता में व्यथित हैं। शृंगीॠषि के मार्गदर्शन में राजा दशरथ पुत्रेष्टि यज्ञ करते हैं। यज्ञ और राजा के पुण्य प्रतापों के फल से तीनों रानियों से चार पुत्र प्राप्त होते हैं। बड़ी रानी कौशल्या के गर्भ से जन्म लेने के पूर्व श्रीहरि विष्णु अपनी माता को अपने विशाल चतुर्भुजी रूप के दर्शन कराते हैं।
श्रीराम जन्मोत्सव पर अवध में जमकर बधाइयां बजीं और आतिशबाजी छुड़ाई गई। दशरथ कुमारों का गुरु वशिष्ठ ने नामकरण संस्कार कराते हुए गुणों के आधार पर राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न नाम दिए। मुनि विश्वामित्र मदद लेने के लिए राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को साथ ले जाते हैं। श्रीराम और लक्ष्मण विशालकाय राक्षसी ताड़का, मारीच और सुबाहू सहित अनेक राक्षसों का वध कर देते हैं। पंडाल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठता है।
लीला मंचन में प्रखर मिश्रा, अथर्व चतुर्वेदी, अक्षत रिछारिया,रुद्रांश भौंडेले, आयुष्मान खरे, रजनीश रिछारिया, संजय शुक्ला, अनुज भोंडेले, बलराम राय, कृष्णकांत नायक आदि ने अभिनय किया। बुधवार को धनुष यज्ञ की लीला का मंचन किया जाएगा।