संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। देखरेख के अभाव में अपना स्वरूप खो चुकीं 13 नदियों को पुनर्जीवित करने की कवायद की जा रही है। इसके लिए मनरेगा विभाग कार्ययोजना तैयार करवा रहा है। इन नदियों में गहरीकरण, चौड़ीकरण, साफ-सफाई, चेकडैम मरम्मतीकरण, रपटा निर्माण सहित अन्य काम कराए जाएंगे।
ललितपुर को बांधों और नदियों का जिला कहा जाता है। यहां 14 बांध परियोजनाएं हैं तो कई छोटी-बड़ी नदियां हैं। इनमें से अधिकतर नदियों पर बांध परियोजना निर्मित है। कुछ नदियां देखरेख के अभाव में अपना स्वरूप खो चुकी हैं। यहां तक कि बड़ी-बड़ी नदियां कई स्थानों पर नाले के रूप में पहुंच चुकी हैं। इन नदियों में सिर्फ बरसात के दिनों में ही पानी बहता है। गर्मी के दिनों में ये सूख जाती हैं, इससे ग्रामीण क्षेत्र के लोग व मवेशी पानी के लिए परेशान होते हैं। जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने स्वरूप खो चुकी नदियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए। मनरेगा विभाग ने ऐसी 13 नदियों को चिह्नित किया जो अपना स्वरूप खो चुकी हैं। अब इन सभी 13 नदियों का ग्राम पंचायत स्तर पर सर्वे शुरू कर दिया गया है। फिर इनके जीर्णोद्धार की कार्ययोजना बनाई जाएगी। मनरेगा विभाग ग्रामीण क्षेत्रों से गुजरी इन नदियों में गहरीकरण, चौड़ीकरण, साफ-सफाई सहित अन्य कार्य कराकर उन्हें पुराने स्वरूप में लाएगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार कुछ महीनों बाद इन नदियों में वर्षभर पानी बहना शुरू हो जाएगा। इसका लाभ इन नदियों के किनारे बसे डेढ़ सौ से अधिक गांव के लोगाें को मिलेगा।
इन नदियों को किया गया चिह्नित
पुनर्जीवित करने के लिए चिह्नित की गई नदियों में जामनी नदी, सजनम नदी, रोहिणी नदी, जमरार नदी, उटारी नदी, शहजाद नदी, बेतवा नदी, नाराहट नदी, भौंडी नदी, सौंर नदी, धसान नदी, घुंसी नदी, बारौन नदी शामिल है।
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कटाव रोकने के लिए दोनों ओर तटबंध पर होगा पौधरोपण
नदी के दोनों ओर किनारों को मजबूत किया जाएगा, जिससे बरसात के दिनों में मिट्टी का कटाव न हो सके। इसके लिए दोनों किनारों पर बांस या अन्य पेड़ लगाए जाएंगे। बांस के पेड़ लगने से मिट्टी का कटाव तो रुकेगा ही गांव के लोगों की आजीविका के लिए भी बांस उपयोगी होगा।
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देखरेख के अभाव में जीवनदायिनी नदियां विलुप्त होती जा रही हैं। जिलाधिकारी के निर्देश पर इन्हें पुनर्जीवित करने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के बाद नदी का जीर्णोद्धार मनरेगा विभाग द्वारा कराया जाएगा।
केके पांडेय, मुख्य विकास अधिकारी