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Lalitpur News: धूप न निकलने से काले पड़ गए पान के पत्ते

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संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। पान की खेती पर कोहरा कहर बनकर टूटा है। करीब आठ दिनों से लगातार धूप न निकलने से पान के पत्ते काले पड़ने लगे हैं। महीनों की मेहनत से तैयार फसल के घाटे में जाने से किसान काफी चिंतित हैं।
पाली तहसील क्षेत्र में 25 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में पान की फसल लगी है। इस बार पत्ते अच्छे होने से किसानों को पूरी उम्मीद थी कि उन्हें बढ़िया आमदनी होगी, लेकिन खराब मौसम के कारण अब पान के पत्ते काले पड़ने लगे हैं। पत्तों से चमक पूरी गायब हो गई है। कुछ खेतों में तो पान के पत्ते पीले भी पड़ने लगे हैं। यहां के किसानों ने बताया कि उनके पास पानी की खेती के अलावा आय का अन्य साधन नहीं है। ऐसे में फसल खराब होने पर आर्थिक संकट आ जाएगा। उन्होंने बताया कि पहले पान बरेली तक सीधे पहुंच जाते थे, अब बसों का संचालन बंद होने से संकट खड़ा हो गया है।
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फोटो- 23, देवकीनंदन चौरसिया

कोहरे से पान की फसल खराब हो रही है, इससे काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पान के पत्ते काले व पीले पड़ने से बाजार में नहीं बिक सकेंगे।-देवकीनंदन चौरसिया
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फोटो- 24,संजीव चौरसिया

तहसील मुख्यालय से बरेली तक के लिए रोडवेज बसें चलती थी। इससे किसानों को सुविधा थी, लेकिन लंबे समय से बस का संचालन बंद होने से पान की खेती पर संकट खड़ा हो गया है।-संजीव चौरसिया
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इनसेट
गेहूं की पत्ती पड़ी पीली और दलहनी फसलों के फूल गिरे

दिसंबर के अंतिम सप्ताह से कोहरा व शीतलहर से कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। कोहरे के साथ गिर रही फुहार दलहनी फसलों को भी प्रभावित कर रही है। धूप न मिलने से गेहूं की फसल पीली पड़ने लगी है। फसलों में दवाइयों का छिड़काव करने के बाद भी कोई असर नहीं हो रहा है। किसानों का कहना है कि एक सप्ताह और धूप नहीं निकली तो फसलें पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगी। कई क्षेत्रों में गेहूं की पत्तियां पीली पड़ने और दलहनी फसलों के फूल गिरने से उत्पादन पर असर की आशंका प्रबल होती जा रही है।
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फोटो- 21,भज्जू रजक, देवरान
कोहरा व पानी की फुहार से मटर का फूल झड़ रहा है। गेहूं के पौधे का निचला हिस्सा भी पीला पड़ता जा रहा है। -भज्जू रजक देवरान

फोटो- 22, हल्के घोसी
अभी फसलों को धूप की अधिक आवश्यकता है। धूप न होने से मटर, चना ही नहीं गेहूं की फसल भी खराब होने लगी है।
-हल्के घोसी

इस तरह से करें बचाव
कृषि वैज्ञानिक डॉ. दिनेश तिवारी ने बताया कि गेहूं की फसल में पीला रतुआ या रोली के प्रभाव से पत्तियों पर पीले या नारंगी रंग के फफोले बनने लगते हैं। बचाव के लिए लक्षण दिखते ही 800 ग्राम जिनेब या मैंकोजेब या 200 मिली प्रोपिकोनाजोल को 200 लीटर पानी में घोल मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। नैनो यूरिया और सागरिका का मिश्रण एक उत्कृष्ट पौध विकास प्रोत्साहक है। यह मिश्रण फसल को नाइट्रोजन, सूक्ष्म पोषक तत्व के साथ ही पौध वृद्धि हार्मोंस भी प्रदान करता है, जिससे उत्पादन में वृद्धि होती है और उपज की गुणवत्ता में सुधार होता है। प्रति लीटर पानी में दो मिली नैनो यूरिया और दो मिली सागरिका का घोल बनाकर पौधों पर बुवाई के एक महीने बाद और फूल आने से एक सप्ताह पहले दो स्प्रे करें।
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