महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के अंतर्गत कूपों का निर्माण कराया गया है। इसके तहत वर्ष 2008-09 से वर्ष 2013-14 तक विभिन्न ब्लाकों में 3,339 कूप स्वीकृत हुए। इसके मुकाबले सात सैकड़ा से ज्यादा कूप अधूरे पड़े हैं। महरौनी ब्लाक में दो सैकड़ा से अधिक कूप पूर्ण नहीं हो सके हैं। इस पर सीडीओ अरुण कुमार उपाध्याय ने खंड विकास अधिकारी गजेेंद्र प्रताप सिंह से जवाब - तलब किया है। इसमें कहा गया कि ग्राम पंचायत सिलावन में कूप का निर्माण होने के बाद सोशल आडिट में कूप मौके पर नहीं पाए गए। इसी गांव में बंधियों पर स्थित स्पिलवे के निर्माण बगैर भुगतान कर दिया गया। ग्राम पंचायत कुसमाड़ में रामचरन के खेत पर एक लाख सैंतीस हजार रुपये की धनराशि सिंचाई कूप पर व्यय की गई। यह कूप भी नहीं पाया गया। ग्राम पंचायत देवरानकलां में छत्ते के खेत तक संपर्क मार्ग पर पुलिया के निर्माण बगैर धनराशि निकाल ली गई। ग्राम भदौरा में मोर्चा से जुगला के खेत तक संपर्क मार्ग पर पुलिया का निर्माण बगैर धनराशि निकाल ली गई। ग्राम पंचायत साढूमल में कल्याण के खेत की बंधी पर स्पिल- वे का निर्माण नहीं कराया गया, जबकि सामग्री खरीद ली गई। इसके अलावा ग्राम पंचायतों में श्रमिकों को कई माह से भुगतान नहीं हुआ है। सीडीओ ने पाई गई अनियमितताओं के संबंध में तीन दिन में ब्योरा उपलब्ध कराने के निर्देेश बीडीओ को दिए हैं।