बांसी/ललितपुर। वर्ष 1990 में श्री राम जन्मभूमि कारसेवा के लिए अयोध्या जा रहे डेढ़ दर्जन कारसेवक गिरफ्तार हुए थे। इसके बाद उरई जेल भेज दिया गया था। जेल में पुलिस द्वारा लाठी चार्ज कर उत्पीड़न किया गया। कई तो बुरी तरह से जख्मी हो गए थे। कारसेवकों को एक माह जेल में बंद रखकर भी पुलिस की शक्ति श्रद्धा और विश्वास को कम नहीं कर सकी थी। मंदिर निर्माण होने के समय कारसेवक अपने पुराने संघर्ष को धन्य मान रहे हैं।
बांसी कस्बा समेत आस-पास के ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश कारसेवकों की उम्र वर्ष 1990 में 25 साल रही होगी। कुछ अधेड़ भी थे। कारसेवकों ने बताया कि मंदिर निर्माण को लेकर एक जुनून था। उस समय मन में इतना उत्साह और मंदिर निर्माण का जोश था कि जान की कोई परवाह तक नहीं थी। एक मात्र उद्देश्य था कि राम मंदिर निर्माण के लिए कार्य करें और मंदिर का निर्माण हो जाए। कारसेवकाें को गिरफ्तार कर ललितपुर और वहां से उरई जेल भेजा गया था। उरई जेल में पुलिस की बर्बर लाठी चार्ज से कई कारसेवक बुरी तरह जख्मी हुए थे। एक माह तक उन्हें जेल में रखा गया था, लेकिन वह हार नहीं माने। शासन प्रशासन का अत्याचार उनकी श्रद्धा और विश्वास को कम न कर सका। आज जब रामलला की प्राण प्रतिष्ठा उनके भव्य मंदिर में 22 जनवरी को होने जा रही है, तब अपने पुराने संघर्ष के लिए अपने को धन्य मान रहे हैं। कारसेवकों की आंखों के सामने जीवन का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण सपना साकार हो रहा है। कारसेवा में जेल में रहे शैलेंद्र कुमार चौबे, सुनील शर्मा, सत्यप्रकाश दुबे, संतोष गुप्ता, भगवान सिंह बुदेला, मनोज पस्तोर, उमेश शर्मा, राजकुमार शर्मा, सुदीप शर्मा, गप्पू गोस्वामी, जयपाल सिंह बुंदेला आदि बंद रहे।
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नौ कारसेवकों की हो चुकी है मौत, लेकिन परिवार के लोगों को है खुशी कि बुजुर्ग कारसेवा में जेल गए
कस्बा से कारसेवा का नेतृत्व करने वाले भाजपा नेता ग्राम पंचायत बांसी के पूर्व प्रधान काशीनाथ दुबे रहे। उनके नेतृत्व में ही कारसेवकों का जत्था अयोध्या के लिए रवाना हुआ। कारसेवा में शामिल पुरुषोत्तम नारायण गंगेले, संतोष कुमार मिश्रा, राजकुमार पुरोहित, सुरेश नायक, घनश्याम सेन, कुंवर बहादुर सिंह बुंदेला आदि थे। हालांकि अब यह दुनिया में नहीं हैं, लेकि उनके परिवारीजनों को प्रसन्नता है कि उनके बुजुर्ग भी भगवान की कारसेवा में जेल रहे थे।